कहा युवाओं को घोषणाएं नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगारपरक प्रशिक्षण और सम्मानजनक रोजगार की ठोस व्यवस्था चाहिए
चंडीगढ़ 26 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने देश में युवाओं की शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत जैसे युवा देश में करोड़ों युवाओं का शिक्षा, रोजगार अथवा प्रशिक्षण से बाहर रहना केवल आर्थिक चुनौती नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक और राष्ट्रीय चिंता का विषय है। केंद्र सरकार को ऐसी ठोस नीति लागू करनी चाहिए, जिससे प्रत्येक युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बाजार की जरूरत के अनुरूप कौशल और सम्मानजनक रोजगार मिल सके।
कुमारी सैलजा ने कहा कि नीति आयोग की अगस्त 2026 में जारी रिमेनिंग स्किलिंग फाॅर विकसित भारत ‘@2047’ रिपोर्ट में देश के करीब 8.7 करोड़ युवाओं को एनईईटी यानी शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर बताया गया है। जिस उम्र में युवाओं के हाथों में किताबें, हुनर और रोजगार होना चाहिए, उस समय इतनी बड़ी युवा आबादी का इन तीनों व्यवस्थाओं से बाहर होना गंभीर चेतावनी है। यह स्थिति बताती है कि शिक्षा से रोजगार तक युवाओं के लिए मजबूत और सहज रास्ता तैयार करने की आवश्यकता है।
सांसद ने कहा कि बेरोजगारी को केवल नौकरियों के आंकड़ों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। यह भी देखना होगा कि शिक्षा पूरी करने के बाद युवाओं के पास उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल है या नहीं और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है या नहीं। शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना समय की आवश्यकता है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि शिक्षा और रोजगार प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का समान अवसर प्रदान करने का माध्यम होना चाहिए। सरकारी शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने, उच्च शिक्षा को गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए सुलभ बनाने, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार करने और सरकारी विभागों के रिक्त पदों को पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से भरने की जरूरत है। एमएसएमई, विनिर्माण, कृषि आधारित उद्योग, सेवा क्षेत्र और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाने चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब देश की युवा शक्ति विकास प्रक्रिया की सबसे बड़ी भागीदार बनेगी। केंद्र की भाजपा सरकार को युवाओं की चिंताओं को राजनीतिक आलोचना मानकर नजरअंदाज करने के बजाय शिक्षा, कौशल और रोजगार को लेकर जवाबदेह राष्ट्रीय कार्ययोजना सामने लानी चाहिए। युवाओं को भाषण और प्रचार से अधिक अपने भविष्य की सुरक्षा, अवसर और सम्मानजनक रोजगार चाहिए। कांग्रेस युवाओं के शिक्षा और रोजगार के अधिकार की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।









