जयंती विशेष : बंसीलाल की विकास-दृष्टि से आज भी बहुत कुछ सीख सकता है हरियाणा

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गांवों तक बिजली, सड़क और नहरें पहुंचाकर आधुनिक हरियाणा की रखी नींव; आज अधूरी परियोजनाएं, जल संकट और बेलगाम अफसरशाही फिर मांग रहे दृढ़ नेतृत्व

वेदप्रकाश विद्रोही

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षा मंत्री चौधरी बंसीलाल की जयंती केवल एक राजनेता को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उस विकास-दृष्टि का मूल्यांकन करने का दिन भी है, जिसने नवगठित हरियाणा को आधुनिक राज्य बनाने की दिशा दी। चौधरी बंसीलाल से राजनीतिक अथवा वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, उनकी कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठाए जा सकते हैं, लेकिन प्रदेश के आधारभूत ढांचे के निर्माण में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता।

26 अगस्त 1927 को भिवानी जिले के गोलागढ़ गांव में जन्मे चौधरी बंसीलाल ने वकालत से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। वह पहली बार 1967 में तोशाम से विधायक निर्वाचित हुए और 1968 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। बाद में उन्होंने अलग-अलग अवधियों में चार बार मुख्यमंत्री का पद संभाला। वह केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री, रेल मंत्री और परिवहन मंत्री भी रहे। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन ने हरियाणा के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरी छाप छोड़ी।

नवगठित प्रदेश को चाहिए थी विकास की रफ्तार

एक नवंबर 1966 को अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आए हरियाणा के सामने अनेक चुनौतियां थीं। बड़ी ग्रामीण आबादी बिजली, पेयजल, शिक्षा, सिंचाई और पक्की सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थी। औद्योगिक आधार सीमित था और सरकारी ढांचा भी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ था।

ऐसे समय में चौधरी बंसीलाल ने मुख्यमंत्री पद संभाला। उन्होंने यह समझा कि किसी नए राज्य की वास्तविक पहचान बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि सड़क, बिजली, पानी, सिंचाई और शिक्षा के मजबूत ढांचे से बनती है। उन्होंने योजनाओं को सरकारी फाइलों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जमीन पर उतारने पर जोर दिया।

उनके शासनकाल में गांवों तक बिजली पहुंचाने, संपर्क मार्ग बनाने, नहरों का विस्तार करने और विद्यालय खोलने की दिशा में बड़े स्तर पर काम हुआ। इसी कारण उन्हें आधुनिक हरियाणा के प्रमुख निर्माताओं में गिना जाता है।

सड़क को बनाया विकास की पहली शर्त

चौधरी बंसीलाल का मानना था कि जिस गांव तक सड़क पहुंच जाती है, वहां विकास के अन्य रास्ते भी खुल जाते हैं। सड़क से किसान अपनी उपज मंडी तक पहुंचा सकता है, बच्चे विद्यालय और मरीज अस्पताल जा सकते हैं तथा ग्रामीण क्षेत्र व्यापार एवं उद्योग से जुड़ सकता है।

उनके दौर में हरियाणा में ग्रामीण संपर्क सड़कों का व्यापक जाल बिछाया गया। जिला मुख्यालयों, कस्बों और गांवों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया। हरियाणा की हाईवे पर्यटन नीति की शुरुआत का श्रेय भी उनके शासन को दिया जाता है। बाद में दूसरे राज्यों ने भी राजमार्गों पर पर्यटन परिसरों की इस अवधारणा को अपनाया।

आज हरियाणा में एक्सप्रेस-वे और चौड़े राष्ट्रीय राजमार्ग तो बन रहे हैं, लेकिन अनेक शहरों और गांवों की अंदरूनी सड़कें टूटने के कुछ समय बाद ही दोबारा निर्माण मांगने लगती हैं। गुरुग्राम जैसे वैश्विक पहचान वाले शहर में हल्की वर्षा के बाद जलभराव और यातायात जाम विकास की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हैं। बंसीलाल की कार्यपद्धति हमें याद दिलाती है कि विकास का अर्थ केवल परियोजना की घोषणा या उद्घाटन नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता और समयबद्ध पूर्णता भी है।

बिजली ने बदली गांवों की तस्वीर

जिस दौर में देश के अधिकांश गांवों तक बिजली पहुंचना सपना माना जाता था, उस समय चौधरी बंसीलाल ने हरियाणा के ग्रामीण विद्युतीकरण को अभियान का रूप दिया। बिजली आने से केवल घर रोशन नहीं हुए, बल्कि कृषि नलकूप, छोटी औद्योगिक इकाइयां, आटा चक्कियां और ग्रामीण व्यवसाय भी आगे बढ़े।

आज हरियाणा को बिजली के क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती मांग, वितरण व्यवस्था, महंगी ऊर्जा, लाइन लॉस, निजीकरण और कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा जैसे मुद्दे सामने हैं। अब लक्ष्य केवल बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि चौबीस घंटे गुणवत्तापूर्ण, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा उपलब्ध कराना होना चाहिए।

सौर ऊर्जा, छतों पर सौर संयंत्र, कृषि फीडरों का आधुनिकीकरण और बिजली भंडारण जैसी नई तकनीकों को अपनाते हुए भी जनहित सर्वोपरि रहना चाहिए। बंसीलाल की विरासत का अर्थ पुराने मॉडल की नकल करना नहीं, बल्कि उसी संकल्प के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था खड़ी करना है।

नहरों ने बदला सूखे क्षेत्रों का भाग्य

हरियाणा के शुष्क और रेतीले क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार चौधरी बंसीलाल की बड़ी उपलब्धियों में माना जाता है। नहरों और उठान सिंचाई परियोजनाओं ने कई इलाकों में खेती की तस्वीर बदल दी। पानी खेतों तक पहुंचा तो उत्पादन बढ़ा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।

आज यही पानी हरियाणा की सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल है। एक ओर अनेक क्षेत्रों में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, दूसरी ओर रोहतक, झज्जर, भिवानी, हिसार, सिरसा और जींद के हिस्सों में जलभराव एवं भूमि की लवणता किसानों को परेशान कर रही है। सरकारी आकलनों में प्रदेश की लाखों एकड़ भूमि जलभराव या लवणता से प्रभावित बताई गई है।

इस स्थिति में हरियाणा को नहरों की मरम्मत, अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने, सूक्ष्म सिंचाई, वर्षा जल संचयन, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक जल प्रबंधन पर एक साथ काम करना होगा। बंसीलाल के समय नहरें भविष्य निर्माण का माध्यम थीं; आज उन्हीं जल संसाधनों का संरक्षण अगली पीढ़ियों के अस्तित्व का प्रश्न बन गया है।

काम समय पर पूरा कराने की पहचान

चौधरी बंसीलाल की सबसे चर्चित विशेषता प्रशासन पर उनकी पकड़ थी। अधिकारी जानते थे कि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ तो जवाब देना पड़ेगा। उनकी कार्यशैली कठोर थी, लेकिन उसके कारण सरकारी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में गति दिखाई देती थी।

आज स्थिति यह है कि अनेक परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती हैं। सीवर लाइन डालने के लिए सड़क खोदी जाती है, लेकिन सड़क का पुनर्निर्माण समय पर नहीं होता। नालों की सफाई वर्षा शुरू होने के बाद याद आती है। एक ही सड़क को अलग-अलग विभाग बार-बार खोदते हैं और जिम्मेदारी तय नहीं होती।

बेलगाम अफसरशाही की शिकायत केवल विपक्ष या सामाजिक संगठनों तक सीमित नहीं है। आम नागरिक भी ऑनलाइन शिकायतों, कार्यालयों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने के बावजूद समाधान न मिलने से परेशान है। आवश्यकता डर पैदा करने वाले प्रशासन की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने वाली पारदर्शी व्यवस्था की है। हर परियोजना के लिए समयसीमा, गुणवत्ता परीक्षण और संबंधित अधिकारी की सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

शिक्षा का विस्तार, अब गुणवत्ता की चुनौती

चौधरी बंसीलाल के शासनकाल में गांवों में विद्यालयों के विस्तार पर जोर दिया गया। उस समय पहली आवश्यकता बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना थी। आज विद्यालय भवन तो बड़ी संख्या में हैं, लेकिन सरकारी शिक्षा के सामने शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं, डिजिटल असमानता और गिरते नामांकन जैसी चुनौतियां हैं।

वर्तमान हरियाणा को बंसीलाल की उसी व्यापक दृष्टि के साथ सरकारी शिक्षा के पुनर्निर्माण की जरूरत है। गांव और शहर के बच्चे को समान गुणवत्ता की शिक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल मैदान और डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराना ही उनके अधूरे सपने को आगे बढ़ाना होगा।

उपलब्धियों के साथ आलोचनाओं को भी स्वीकारना होगा

किसी भी बड़े राजनेता का निष्पक्ष मूल्यांकन केवल प्रशंसा से नहीं हो सकता। चौधरी बंसीलाल की कठोर प्रशासनिक शैली को कई आलोचकों ने निरंकुश भी माना। विशेष रूप से आपातकाल के दौर में उनकी भूमिका और नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगे प्रतिबंध इतिहास की बहस का हिस्सा रहे हैं।

उनके विकास कार्यों का सम्मान करते हुए यह भी स्वीकार करना होगा कि लोकतंत्र में कार्यकुशलता और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन आवश्यक है। मजबूत सरकार का अर्थ विपक्ष, मीडिया अथवा असहमति की आवाज को दबाना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर तेजी से जनहित के फैसले लेना है।

बंसीलाल के जीवन से विकास की दृढ़ता ग्रहण की जानी चाहिए, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रता के प्रति संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है।

आज के हरियाणा के लिए पांच बड़े संदेश

चौधरी बंसीलाल की विकास-दृष्टि आज के हरियाणा को पांच स्पष्ट संदेश देती है—घोषणा से अधिक क्रियान्वयन, परियोजना से अधिक गुणवत्ता, सुविधा से अधिक समान पहुंच, अधिकार के साथ जवाबदेही और वर्तमान विकास के साथ भविष्य के संसाधनों का संरक्षण।

गुरुग्राम और फरीदाबाद की चमक को ही पूरे प्रदेश का विकास नहीं माना जा सकता। नूंह, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, भिवानी, सिरसा और प्रदेश के अन्य अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भी उतना ही जरूरी है। विकास का वास्तविक पैमाना यह होना चाहिए कि आखिरी गांव और सबसे कमजोर नागरिक तक सुविधा कितनी पहुंची।

विरासत पर राजनीति नहीं, नीति बने

महापुरुषों की जयंती पर माल्यार्पण करना आसान है, लेकिन उनकी कार्यसंस्कृति अपनाना कठिन। चौधरी बंसीलाल को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हरियाणा सरकार विकास योजनाओं को तय समय में पूरा करवाए, निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करे, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाए और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करे।

हरियाणा को अब ऐसी विकास-दृष्टि चाहिए, जिसमें गांव और शहर, किसान और मजदूर, उद्योग और पर्यावरण तथा तकनीक और मानवीय संवेदना के बीच संतुलन हो। राज्य को कंक्रीट के जंगल नहीं, रहने योग्य शहर; केवल बिजली कनेक्शन नहीं, स्वच्छ ऊर्जा; केवल नहरें नहीं, टिकाऊ जल प्रबंधन और केवल स्कूल भवन नहीं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चाहिए।

चौधरी बंसीलाल अपनी बात के धनी, कठोर प्रशासक और विकास के प्रति प्रतिबद्ध नेता थे। उन्होंने हरियाणा को निर्माण की वह रफ्तार दी, जिसने नवगठित प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी जयंती पर शत-शत नमन के साथ आज सबसे प्रासंगिक संकल्प यही होगा—हरियाणा में विकास की घोषणा नहीं, विकास का परिणाम दिखाई दे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

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