विभागीय अनदेखी का खामियाजा भुगत रहा आईडीसी, जलभराव से उद्योगों पर संकट

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कुछ घंटों की बारिश में डूब जाती हैं सड़कें, फैक्ट्रियों में भरता है सीवर का पानी; उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से लगाई स्थायी समाधान की गुहार

गुरुग्राम। प्रदेश के राजस्व और गुरुग्राम की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले आईडीसी औद्योगिक क्षेत्र की बदहाल स्थिति अब उद्योगों के अस्तित्व पर ही संकट बनती जा रही है। वर्षों से चली आ रही विभागीय लापरवाही, अधूरी विकास परियोजनाएं और जर्जर ड्रेनेज व्यवस्था के कारण उद्यमियों का धैर्य जवाब देने लगा है। हालात ऐसे हैं कि कई उद्योगपति अब अपने प्रतिष्ठान दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

आईडीसी के प्रधान धर्मसागर, सुनील दत्ता, विजय टंडन, देवेंद्र जैन, प्रवीण वर्मा और तरुण खन्ना ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि हर वर्ष मानसून से पहले नगर निगम, जीएमडीए और एचएसवीपी के अधिकारियों की लंबी-लंबी बैठकें होती हैं, बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहते हैं।

उद्यमियों का कहना है कि हाल ही में हुई महज डेढ़ से दो घंटे की बारिश ने प्रशासनिक तैयारियों की पूरी पोल खोल दी। आईडीसी की अधिकांश सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और कई फैक्ट्रियों में सीवर का गंदा पानी भर गया। इससे मशीनों का संचालन रुक गया, उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया और लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उद्योगों को उठाना पड़ा।

उन्होंने बताया कि पिछले करीब आठ महीनों से सड़क और ड्रेनेज सुधार कार्य चल रहा है, लेकिन कार्य की धीमी गति और अव्यवस्थित निर्माण के कारण समस्या पहले से अधिक गंभीर हो गई है। जगह-जगह खुदाई और अधूरे निर्माण कार्य के चलते बारिश का पानी निकलने की बजाय फैक्ट्रियों और सड़कों पर जमा हो रहा है।

उद्यमियों ने कहा कि फैक्ट्रियों के भीतर सीवर का बदबूदार पानी भरने से कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। जलभराव के कारण संक्रमण और त्वचा रोग फैलने की आशंका बनी रहती है। कई श्रमिक ऐसी परिस्थितियों में काम करने से इंकार कर रहे हैं, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम ने निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों को कार्यस्थल पर टीनशेड लगाने के निर्देश दिए थे, ताकि धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण रखा जा सके। लेकिन आईडीसी सहित अधिकांश निर्माण स्थलों पर इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और जिम्मेदार विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।

प्रधान धर्मसागर ने कहा कि उद्यमी कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रख चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान बैठकों और फाइलों से नहीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी कार्यवाही से होगा।

उद्योगों के पलायन का बढ़ा खतरा

उद्यमियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सीवर, ड्रेनेज और सड़क व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त नहीं किया गया तो आईडीसी क्षेत्र से उद्योगों का पलायन तेज हो सकता है। इससे न केवल हजारों लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि प्रदेश के राजस्व और औद्योगिक विकास को भी बड़ा झटका लगेगा।

उद्यमियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि आईडीसी की वर्षों पुरानी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि गुरुग्राम का यह प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र फिर से सुचारु रूप से संचालित हो सके।

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Author: Bharat Sarathi

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