माजरा एम्स के श्रेय पर भाजपा में छिड़ी खींचतान : विद्रोही

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कहा—पहला श्रेय अहीरवाल की 36 बिरादरी के संघर्ष और दूसरा जमीन देने वाले माजरा के किसानों को

रेवाड़ी, 20 सितम्बर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि माजरा एम्स के निर्माण का श्रेय लेने के लिए अहीरवाल भाजपा में गुटीय खींचतान तेज हो गई है। भाजपा नेता बयानबाजी के माध्यम से एक-दूसरे के दावों को कमजोर करने में लगे हैं, जबकि एम्स का वास्तविक श्रेय क्षेत्र की जनता के लंबे संघर्ष और जमीन देने वाले माजरा के किसानों को मिलना चाहिए।

विद्रोही ने कहा कि अहीरवाल भाजपा लंबे समय से केंद्रीय मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह समर्थक और विरोधी खेमों में बंटी हुई है। दोनों गुट एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। अब माजरा एम्स के निर्माण का श्रेय लेने की होड़ ने इस गुटबाजी को फिर उजागर कर दिया है।

आरती राव और डॉ. बनवारी लाल के दावों पर सवाल

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने एक कार्यक्रम में माजरा एम्स का श्रेय राव इन्द्रजीत सिंह को दिया तो दूसरे खेमे ने तत्काल उनके दावे पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कभी राव इन्द्रजीत सिंह के सहयोगी रहे पूर्व मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने एम्स का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को देते हुए क्षेत्र की जनता के संघर्ष की भूमिका का भी उल्लेख किया।

विद्रोही के अनुसार, भाजपा के दोनों खेमों में अहीरवाल के विकास कार्यों का श्रेय लेने की होड़ मची हुई है। इसलिए माजरा एम्स के निर्माण की पूरी प्रक्रिया का निष्पक्ष और स्वतंत्र विश्लेषण किया जाना चाहिए।

‘जनता के संघर्ष ने सरकार को किया मजबूर’

विद्रोही ने दावा किया कि माजरा एम्स का पहला और सबसे बड़ा श्रेय अहीरवाल की 36 बिरादरी, विभिन्न राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों के संयुक्त संघर्ष को जाता है। जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने एम्स की घोषणा को कथित रूप से ‘जुमला’ बताया, तब क्षेत्र की जनता ने संघर्ष का बिगुल बजाया और सरकार को परियोजना आगे बढ़ाने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने कहा कि जून 2015 में केंद्र सरकार द्वारा प्रत्येक राज्य में एक एम्स स्थापित करने की नीति सामने आने के बाद 7 जुलाई 2015 को बावल में आयोजित भाजपा की जनसभा में राव इन्द्रजीत सिंह और तत्कालीन विधायक डॉ. बनवारी लाल ने मनेठी में एम्स स्थापित करने की मांग उठाई थी। इस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने मनेठी में एम्स बनाने की घोषणा की, लेकिन परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।

किसानों के त्याग के बिना संभव नहीं था एम्स

विद्रोही ने कहा कि लगभग पांच वर्ष चले जनसंघर्ष के बाद माजरा में एम्स निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यदि माजरा गांव के किसान अपनी करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन एम्स के लिए रियायती दर पर उपलब्ध नहीं कराते तो यह परियोजना साकार नहीं हो सकती थी।

उन्होंने माजरा एम्स के श्रेय का क्रम बताते हुए कहा कि पहला श्रेय अहीरवाल की जनता के संघर्ष, दूसरा जमीन देने वाले माजरा के किसानों, तीसरा जनप्रतिनिधि के रूप में परियोजना की पैरवी करने वाले राव इन्द्रजीत सिंह और चौथा श्रेय उस समय सत्ता में रही भाजपा सरकार को दिया जा सकता है।

‘वोट बैंक की मजबूरी का परिणाम’

विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एम्स निर्माण के प्रति शुरू से गंभीर होती तो परियोजना में इतना विलम्ब नहीं होता। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले इसका शिलान्यास गुरुग्राम, भिवानी-महेन्द्रगढ़, रोहतक और राजस्थान के अलवर लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से किया गया।

उन्होंने कहा, “माजरा एम्स किसी एक नेता की देन नहीं, बल्कि अहीरवाल की जनता के संघर्ष, माजरा के किसानों के त्याग और भाजपा की चुनावी मजबूरी का परिणाम है।”

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Author: Bharat Sarathi

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