17 जिलों के 56 प्रतिभागियों ने सीखीं मंच संचालन की बारीकियां

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हरियाणा कला परिषद की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला शुरू; विशेषज्ञों ने बताए प्रभावी संवाद, उच्चारण और समय प्रबंधन के गुर

मंच संचालक समाज और संस्कृति का दर्पण : महेश जोशी

कुरुक्षेत्र, 19 सितम्बर (प्रमोद कौशिक)। हरियाणा कला परिषद की ओर से प्रदेश के युवाओं और कला प्रेमियों को मंच संचालन की बारीकियों से परिचित कराने के लिए कला कीर्ति भवन में दो दिवसीय राज्य स्तरीय मंच संचालन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रदेश के 17 जिलों से चयनित 56 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

कार्यशाला के लिए हरियाणा भर से 80 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से उच्च स्तरीय चयन समिति ने पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से 56 प्रतिभागियों का चयन किया। पहले दिन प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ प्रशिक्षकों से मंच संचालन के तकनीकी और व्यावहारिक पक्षों की जानकारी लेने के साथ उनका अभ्यास भी किया।

कार्यशाला के शुभारंभ पर हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने प्रशिक्षक जैनेंद्र सिंह, डॉ. अशोक बत्रा, डॉ. पंकज गौड़ और अनिल कौशिक को अंगवस्त्र तथा पुष्प भेंटकर सम्मानित किया। मुख्य मंच का संचालन विकास शर्मा ने किया।

केवल माइक पर बोलना मंच संचालन नहीं

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए महेश जोशी ने कहा कि मंच संचालन केवल माइक पर बोलने का नाम नहीं, बल्कि अत्यंत जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से जुड़ी कला है। कुशल मंच संचालक किसी भी कार्यक्रम की रीढ़ होता है और मंच तथा दर्शकों के बीच सेतु की भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि मंच संचालक समाज और संस्कृति का दर्पण होता है। हरियाणा कला परिषद का उद्देश्य प्रदेश में छिपी प्रतिभाओं को निखारकर उन्हें अपनी योग्यता प्रदर्शित करने के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराना है।

आत्मविश्वास और शुद्ध उच्चारण पर जोर

पहले सत्र में डॉ. पंकज गौड़ ने डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से मंच संचालक की भूमिका और उत्तरदायित्वों की जानकारी दी। उन्होंने मंच-शिष्टाचार, बोलने की गति, उचित विराम और निरंतर अभ्यास का महत्व समझाया।

प्रसिद्ध मंच उद्घोषक जैनेंद्र सिंह ने युवाओं को मंच के भय से मुक्त होकर आत्मविश्वास विकसित करने के गुर बताए। उन्होंने माइक्रोफोन के सही उपयोग, शालीन आचरण, भाषा की शुद्धता, सटीक उच्चारण, शब्द चयन, स्वर में उतार-चढ़ाव, नेत्र संपर्क और स्मृति कौशल की जानकारी दी।

उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने, प्रभावशाली शुरुआत, अतिथियों का गरिमापूर्ण परिचय देने तथा कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को आपस में जोड़ने की तकनीक भी समझाई।

अवसर के अनुरूप भाषा और भाव जरूरी

डॉ. अशोक बत्रा ने विभिन्न आयोजनों में मंच संचालक की बदलती भूमिका और भाव-भंगिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने शोक संवेदना, उल्लास, हास-परिहास, समर्थन-विरोध, उत्सव, कलात्मक प्रस्तुतियों, भक्ति, सेवा, स्वागत और विदाई से जुड़े कार्यक्रमों में अपनाए जाने वाले उचित लहजे तथा सावधानियों की जानकारी दी।

विशेषज्ञ अनिल कौशिक ने पुरस्कार वितरण, धन्यवाद ज्ञापन और समय प्रबंधन के साथ मंच पर अचानक उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों को सूझबूझ से संभालने के व्यावहारिक उपाय बताए।

सायंकालीन सत्र में जैनेंद्र सिंह ने कार्यक्रम के स्वरूप के अनुरूप शुरुआत, मंच संचालक की वेशभूषा, अतिथियों के संबोधन और श्रोताओं को अनुशासित बनाए रखने के तरीके समझाए। उन्होंने अलग-अलग आयोजनों के लिए उपयुक्त शब्दावली और भाषा-शैली के चयन पर विशेष जोर दिया।

पहले दिन प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी का व्यावहारिक अभ्यास भी किया। आयोजकों के अनुसार यह कार्यशाला हरियाणा में पेशेवर और कुशल मंच संचालकों की नई पीढ़ी तैयार करने में सहायक सिद्ध होगी।

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Author: Bharat Sarathi

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