गीता यज्ञ और विशाल भंडारे के साथ मनाया राधाष्टमी पर्व

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श्रीराधा वह तत्व, जहां केवल प्रेम और भाव है : डॉ. स्वामी चिदानंद ब्रह्मचारी

थानेसर, संजीव कुमारी। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में राधाष्टमी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। अनंत शिशु आश्रम, ओडिशा के बाबा बलिया महाराज के सान्निध्य में गीता यज्ञ, धार्मिक प्रवचन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। आश्रम से जुड़े अनेक श्रद्धालु भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ओडिशा से कुरुक्षेत्र पहुंचे।

गीता भवन परिसर में डॉ. स्वामी चिदानंद ब्रह्मचारी जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित सत्संग में श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम तत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

डॉ. स्वामी चिदानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि अनंत शिशु आश्रम के श्रद्धालु बाबा बलिया महाराज के सान्निध्य में पिछले 32 वर्षों से राधाष्टमी पर्व मनाने कुरुक्षेत्र आते हैं। प्रातःकाल गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर में ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों के पाठ के साथ हवन किया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के उपरांत प्रसाद वितरण और विशाल भंडारा आयोजित हुआ।

राधा यानी प्रेम की धारा

डॉ. स्वामी चिदानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि कुरुक्षेत्र में राधाष्टमी का पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम और भाव के व्यापक स्वरूप की अभिव्यक्ति है। श्रीराधा ऐसा तत्व हैं, जहां केवल प्रेम, भक्ति और समर्पण का भाव है। श्रीकृष्ण और श्रीराधा को अंतरंग रूप से एक ही स्वरूप माना गया है। लीला की दृष्टि से दोनों अलग दिखाई देते हैं, लेकिन प्रेम और भाव के स्तर पर उनमें कोई भिन्नता अथवा द्वैत नहीं है।

उन्होंने कहा कि ‘राधा’ शब्द को उलटने पर ‘धारा’ बनता है और श्रीराधा प्रेम की उसी अविरल धारा की प्रतीक हैं, जो भक्त को भगवान से जोड़ती है।

कुरुक्षेत्र में हुआ था राधा-कृष्ण का पुनर्मिलन

स्वामी चिदानंद ने धार्मिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि लंबे अंतराल के बाद भगवान श्रीकृष्ण सूर्यग्रहण के अवसर पर द्वारका से कुरुक्षेत्र पहुंचे थे। इसी दौरान उनका श्रीराधा, ब्रज की गोपियों और माता यशोदा से पुनर्मिलन हुआ था। धार्मिक परंपरा में इस मिलन को कुरुक्षेत्र से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण घटना माना गया है। इसी कारण राधाष्टमी के अवसर पर यहां राधा-कृष्ण के प्रेम, भक्ति और समर्पण का विशेष स्मरण किया जाता है।

सायंकाल धर्मनगरी में श्रद्धालुओं ने पौधरोपण किया। इसके बाद गीता ज्ञान व्याख्यान और शांति पाठ के साथ धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ।

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Author: Bharat Sarathi

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