हरियाणा में बढ़ेगी प्रदूषण प्रबंधन क्षमता; यमुना को मिलेगा नया जीवन

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18 नए एसटीपी स्थापित होंगे; छह मौजूदा संयंत्रों का होगा उन्नयन, 12 सीईटीपी भी विकसित होंगे

छह बायोगैस संयंत्र लगेंगे; यमुना तटवर्ती सभी चिन्हित तालाबों का होगा पुनरुद्धार

चंडीगढ़, 30 जुलाई-हरियाणा सरकार ने यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए व्यापक कार्ययोजना को गति देते हुए सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा जलाशयों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। इस कार्ययोजना के तहत कुल 621 एमएलडी क्षमता के 18 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे, छह मौजूदा एसटीपी का तकनीकी उन्नयन किया जाएगा, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 12 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) विकसित किए जाएंगे, यमुना बेसिन के सभी 33 शहरी स्थानीय निकायों में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (आईएसडब्ल्यूएम) क्लस्टर स्थापित होंगे। इसके अलावा छह बायोगैस संयंत्र लगाए जाएंगे तथा यमुना तटवर्ती सभी चिन्हित तालाबों को पुनर्जीवित किया जाएगा।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां यमुना पुनर्जीवन कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यमुना नदी के संरक्षण के लिए सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक उपचार, प्रदूषण नियंत्रण तथा पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन के कार्यों में विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री विनय प्रताप सिंह ने बताया कि 284 एमएलडी की संयुक्त क्षमता वाले छह मौजूदा एसटीपी का तकनीकी उन्नयन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 932.18 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 621 एमएलडी क्षमता के 18 नए एसटीपी प्रस्तावित अथवा निर्माणाधीन हैं, जिनसे यमुना बेसिन में सीवेज उपचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण को और सुदृढ़ बनाने के लिए 187.25 एमएलडी की संयुक्त क्षमता वाली 12 सीईटीपी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से यमुना बेसिन के 6,417 उद्योगों से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार की शेष आवश्यकता पूरी की जाएगी।

बैठक में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत और बहादुरगढ़ में प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन एसटीपी तथा विभिन्न स्थानों पर सीईटीपी परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निविदा प्रक्रिया, स्वीकृतियों तथा निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि अतिरिक्त उपचार क्षमता निर्धारित समय के भीतर संचालित की जा सके।

एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन रणनीति के तहत यमुना बेसिन के सभी 33 शहरी स्थानीय निकायों में आईएसडब्ल्यूएम क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे, जिससे शहरी ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दुग्ध अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण और सतत अपशिष्ट प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए 1,250 टन प्रतिदिन की संयुक्त क्षमता वाले छह बायोगैस संयंत्र भी स्थापित किए जाएंगे।

कार्ययोजना में पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन पर भी विशेष बल दिया गया है। यमुना तटवर्ती क्षेत्र में 61 तालाबों एवं जलाशयों की पहचान की गई है। इनमें से 11 तालाबों का पुनर्जीवन किया जा चुका है, जबकि शेष सभी जलाशयों का एक वर्ष के भीतर तटबंध निर्माण, प्रदूषित जल के प्रवाह को रोकने तथा अन्य संरक्षण उपायों के माध्यम से पुनर्जीवन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैठक में बताया गया कि हरियाणा में वर्तमान में 86 एसटीपी, 17 सीईटीपी, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट उपचार की सुदृढ़ व्यवस्था, अधिकृत खतरनाक अपशिष्ट निस्तारण सुविधाएं तथा ई-कचरा रिसाइकल का मजबूत नेटवर्क है। इन नई परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य की प्रदूषण प्रबंधन क्षमता और अधिक मजबूत होगी तथा यमुना नदी के दीर्घकालिक संरक्षण को नई गति मिलेगी।

बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री अशोक कुमार मीणा, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री सुशील सारवान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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Author: Bharat Sarathi

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