13 किमी नई ड्रेनेज लाइन, 70 किमी से अधिक मास्टर ड्रेनों की सफाई , 1,500 नए रोड इनलेट बनाए गए
गुरुग्राम, 24 जुलाई। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) द्वारा किए गए व्यापक ड्रेनेज सुधार कार्यों का सकारात्मक प्रभाव इस मानसून में स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। शहर में वर्ष 2019 में जहां लगभग 90 स्थान जलभराव के लिए चिन्हित थे, वहीं अब इनकी संख्या घटकर केवल 7 रह गई है।
यह जानकारी आज यहाँ देते हुए जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी.सी. मीणा ने बताया कि स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण, सफाई करने , निगरानी और फील्ड स्तर पर बेहतर तैयारियों के कारण जल निकासी व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्तमान में नरसिंहपुर, खांडसा चौक, ज्वाला मिल रोड, चक्करपुर के पास सेक्टर-28, लक्ष्मण विहार, शीतला माता रोड तथा कृष्णा चौक ऐसे सात स्थान हैं, जहां जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि जीएमडीए ने शहरी बाढ़ प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनाते हुए स्थायी अवसंरचना निर्माण के साथ नियमित रखरखाव और निगरानी व्यवस्था को भी महत्व दिया है। हाल ही में हुई वर्षा के दौरान इसके उत्साहजनक परिणाम देखने को मिले हैं।
तीन प्रमुख ड्रेनेज परियोजनाओं से मिली राहत
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि जीएमडीए ने 13 किलोमीटर से अधिक नई स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज अवसंरचना विकसित की है। इसके अंतर्गत सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) पर वाटिका चौक से एनएच-48 तक मास्टर कैरियर ड्रेन लेग-4 का निर्माण किया गया और नरसिंहपुर में लेग-3 बादशाहपुर ड्रेन से 700 मीटर लंबा स्टॉर्म वाटर ड्रेन जोड़ा गया है । यही नहीं, ताऊ देवी लाल स्टेडियम के अंदर से नई ड्रेन बनाई गई है । इन तीनों परियोजनाओं को मानसून शुरू होने से पहले चालू कर दिया गया था, जिससे एसपीआर, मेदांता रोड, नरसिंहपुर और राजीव चौक जैसे क्षेत्रों में वर्षा जल की निकासी पहले की तुलना में काफी तेज हुई और जलभराव में उल्लेखनीय कमी आई।
70 किमी से अधिक मास्टर ड्रेनों की सफाई
श्री मीणा ने बताया कि जीएमडीए ने 70.56 किलोमीटर से अधिक मास्टर ड्रेन नेटवर्क की गाद निकालकर सफाई कर इनकी पुनर्स्थापना की है। इसके अलावा 60 किलोमीटर से अधिक सतही नालों की सफाई कर उनकी जल वहन क्षमता बढ़ाई गई है। पूरे शहर में 1,500 से अधिक नए रोड गली इनलेट भी बनाए गए हैं, जिससे बारिश का पानी तेजी से ड्रेनेज सिस्टम तक पहुंच रहा है और सड़कों पर जलभराव कम हुआ है।
उन्होंने बताया कि लगभग 45 किलोमीटर लंबी ग्रीन बेल्ट से मलबा, मिट्टी और कचरा हटाकर उन्हें ठीक किया गया है। वहीं 35 किलोमीटर से अधिक ग्रीन बेल्ट को इस प्रकार विकसित किया गया है कि वे ग्रीन ड्रेन के रूप में कार्य करते हुए वर्षा जल की निकासी के साथ-साथ भूजल स्तर सुधारने में भी सहायक बनें।
आईआईटी दिल्ली के सहयोग से विकसित हो रही हरित जल संचयन संरचनाएं
श्री मीणा ने बताया कि जीएमडीए पहली बार आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से सेक्टर-31, सेक्टर-39 तथा एआईटी चौक के निकट आधुनिक जल संचयन संरचनाएं विकसित कर रहा है। इनका उद्देश्य वर्षा जल का संग्रहण, भूजल रिचार्ज करना तथा सतही जल बहाव को सुचारू करना है, जिससे भविष्य में शहरी बाढ़ प्रबंधन और अधिक प्रभावी तथा पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
34 से अधिक पंप सेट तैनात, एजेंसियों के साथ समन्वय
उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान त्वरित जल निकासी सुनिश्चित करने के लिए 34 से अधिक सबमर्सिबल पंप सेट विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए हैं। हीरो होंडा चौक से नरसिंहपुर तक एनएच-48 पर चार पंप लगाए गए हैं, जबकि खांडसा चौक, मेदांता रोड, शीतला माता रोड सहित अन्य जलभराव संभावित क्षेत्रों में भी पंप सेट लगाए गए हैं।
श्री मीणा ने कहा कि सोहना रोड पर जलभराव की समस्या के समाधान के लिए जीएमडीए, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। सभी एजेंसियां स्थायी इंजीनियरिंग समाधान लागू करने की दिशा में समन्वित प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि जीएमडीए वैज्ञानिक योजना, समयबद्ध अवसंरचना विकास और निरंतर निगरानी के माध्यम से गुरुग्राम के ड्रेनेज नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भविष्य में भी शहर भारी वर्षा के दौरान सुरक्षित रहे और नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके।







