पेपर लीक मामले पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, विपक्ष के प्रदर्शन को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 22 जुलाई। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कुमारी सैलजा ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होगा। सरकार संसद से सड़क तक उठ रही हर आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई और इसके विरोध में विपक्ष द्वारा संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार संवाद के बजाय दमन की राजनीति अपना रही है। उन्होंने बताया कि विपक्षी सांसदों ने काले कपड़े पहनकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया और छात्रों की मांगों को संसद के अंदर और बाहर उठाया।
उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज केवल युवाओं पर बल प्रयोग नहीं, बल्कि उनके सपनों, संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर हमला है। पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से परेशान छात्र अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने की बजाय पुलिस बल और बैरिकेड का सहारा ले रही है।
सैलजा ने मांग की कि छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री देश से माफी मांगें और केंद्रीय शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है।
संसद में चर्चा से बच रही सरकार : सैलजा
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अहम भूमिका होती है। संसद जनता की आवाज उठाने का सबसे बड़ा मंच है, लेकिन वर्तमान सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचती नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि जब विपक्ष छात्रों, किसानों, बेरोजगारी, महंगाई और अन्य मुद्दों को संसद में उठाना चाहता है तो उसे पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता। ऐसे में जनता की आवाज सड़क तक पहुंचना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार युवाओं, किसानों और आम नागरिकों के मुद्दे उठाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है।
विपक्षी नेताओं की हिरासत पर उठाए सवाल
कुमारी सैलजा ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि संसद परिसर में विपक्ष का संयुक्त विरोध यह संदेश देता है कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि किसान आंदोलन के दौरान भी संवाद की जगह टकराव का रास्ता अपनाया गया। एमएसपी पर किए गए वादे आज तक अधूरे हैं, जिससे किसानों और आम लोगों का सरकार पर विश्वास कमजोर हुआ है।
कांग्रेस ने रखी कई मांगें
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि संसद में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की विफलताओं पर तत्काल चर्चा कराई जाए। इसके साथ ही शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, सुरक्षित और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू हो तथा परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को पुनर्परीक्षा, उचित मुआवजा और कानूनी अधिकारों की गारंटी दी जाए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत संवाद, जवाबदेही और जनता की भावनाओं के सम्मान में होती है। यदि सरकार हर विरोध को दबाने का प्रयास करेगी तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होंगी। कांग्रेस युवाओं, किसानों और आम नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई संसद से सड़क तक जारी रखेगी।









