छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस सांसदों को हिरासत में लेने की आलोचना, प्रधानमंत्री से संवाद की पहल करने की मांग
रेवाड़ी, 22 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने छात्र आंदोलन के समर्थन में प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं के धरने के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य सांसदों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया।
विद्रोही ने जारी बयान में कहा कि यदि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ पुलिस इस प्रकार का व्यवहार कर सकती है, तो आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के रवैये का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने छात्र-युवा आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्र व्यवहार की भी निंदा की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में विपक्ष को छात्र आंदोलन और पेपर लीक जैसे मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दे रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर विपक्ष ने जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें कोई गलत बात नहीं थी।
विद्रोही ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करते, तो वे स्वयं बाहर आकर विपक्ष के नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास करते। इसके बजाय, उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में पुलिस के माध्यम से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य सांसदों को हिरासत में लिया गया।
उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी के साथ धक्का-मुक्की में उन्हें चोट लगी, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। विद्रोही ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं और अधिकारों की रक्षा के लिए आम जनता को भी आगे आकर आवाज उठानी होगी।









