गुरुग्राम में छात्रा मायरा भंडारी ने शुरू किया ‘हृदय रक्षक अभियान’, युवाओं को मिलेगा जीवनरक्षक

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सीपीआर और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देकर ‘हार्ट-सेफ’ समुदाय बनाने की पहल, पारस हेल्थ और निर्वाणा पैटियो क्लब आरडब्ल्यूए का सहयोग

गुरुग्राम, 20 जुलाई। अचानक हृदय गति रुकने (सडन कार्डियक अरेस्ट) की बढ़ती घटनाओं के बीच गुरुग्राम में समुदाय को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘हृदय रक्षक अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अनूठी पहल की शुरुआत हेरिटेज इंटरनेशनल एक्सपीरियेंशियल स्कूल सेक्टर-58 की कक्षा 11 (डीपी-1) की छात्रा मायरा भंडारी ने की है।

इस अभियान को पारस हेल्थ, गुरुग्राम में कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक एवं यूनिट प्रमुख डॉ. अमित भूषण शर्मा तथा निर्वाणा पैटियो क्लब आरडब्ल्यूए का सहयोग प्राप्त है। अभियान का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स’ तैयार करना है, जो आपातकालीन स्थिति में शुरुआती मदद देकर लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

अभियान का संदेश “बड़ों की सुरक्षा, बच्चों के हाथ” है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती तीन से पांच मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान यदि समय पर सीपीआर और प्राथमिक सहायता मिल जाए तो मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

अभियान के तहत गुरुग्राम के आवासीय परिसरों और शिक्षण संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें पारस हेल्थ के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) की सही तकनीक, हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों की पहचान, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को तुरंत सूचना देने तथा प्राथमिक उपचार संबंधी आवश्यक जानकारी देंगे।

लॉन्च कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने कहा कि उनका लक्ष्य प्रत्येक परिवार में कम से कम एक ऐसा व्यक्ति तैयार करना है, जो मेडिकल इमरजेंसी के समय घबराने के बजाय आत्मविश्वास के साथ सही कदम उठा सके। अभियान का विजन “तैयार रहें, जिम्मेदार बनें” तथा संदेश “जीवन बचाने वाले बनें” है, जिसके माध्यम से स्थानीय समुदायों को ‘हार्ट-सेफ’ बनाने का प्रयास किया जाएगा।

दीर्घकालिक स्वास्थ्य आंदोलन की परिकल्पना

मायरा भंडारी ने बताया कि यह पहल केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामुदायिक स्वास्थ्य आंदोलन है। पारस हेल्थ के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने इसे समाज में जीवनरक्षक कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया है।

भावी चिकित्सक बनने की इच्छा रखने वाली मायरा आगे भी विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना चाहती हैं, ताकि निवासी, देखभालकर्ता और सहयोगी कर्मचारी आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी सहायता देने में सक्षम बन सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों और आंगनवाड़ियों तक पहुंचेगा अभियान

मायरा की योजना इस अभियान का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों और आंगनवाड़ियों तक करने की भी है, जहां समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध होना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। इसके तहत ग्रामीण युवाओं, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों को सीपीआर, कार्डियक अरेस्ट की पहचान, प्राथमिक उपचार तथा आपातकालीन सहायता का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंचने से पहले समुदाय स्वयं जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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