ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया की भूमिका पर उठाए सवाल
रेवाडी, 20 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने केंद्र की मोदी-भाजपा-आरएसएस सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग के जरिए लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है और जनादेश की भावना को कमजोर किया जा रहा है।
जारी बयान में विद्रोही ने आरोप लगाया कि सभी संवैधानिक संस्थाओं पर वैचारिक प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिलने के बावजूद पार्टी संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और अन्य माध्यमों से सांसदों को अपने पक्ष में लाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
वेदप्रकाश विद्रोही ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायपालिका संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के मामलों में अपेक्षित भूमिका नहीं निभा रही है। उन्होंने दलबदल कानून से जुड़े मामलों में शीघ्र और स्पष्ट निर्णय की आवश्यकता जताई।
उन्होंने चुनाव आयोग पर भी निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठाए तथा आरोप लगाया कि संसद में विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। विद्रोही ने कहा कि धरना-प्रदर्शन के अधिकारों पर भी लगातार अंकुश लगाया जा रहा है।
मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि देश के बड़े मीडिया संस्थानों पर पूंजीपतियों का प्रभाव बढ़ गया है, जिसके कारण आम जनता के मुद्दों की अपेक्षा सरकार के पक्ष को अधिक प्रमुखता मिल रही है।
अपने बयान के अंत में वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करनी है तो आम नागरिकों को इसके लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से आगे आना होगा।








