-अब तक 20 से अधिक लोगों ने कराया पंजीकरण
-नागरिकों, संस्थानों और डेवलपर्स से पुनः उपयोग योग्य निर्माण सामग्री नि:शुल्क प्राप्त करने के लिए पोर्टल का उपयोग करने की अपील
गुरुग्राम, 18 जुलाई: गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) द्वारा शुरू किए गए ऑनलाइन कंस्ट्रक्शन एवं डिमोलिशन वेस्ट (सीएंडडी वेस्ट) पोर्टल को नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। पोर्टल शुरू होने के कुछ ही दिनों में 20 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है और 4 ऑनलाइन अनुमति पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी.सी. मीणा ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली निर्माण सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि निर्माण अपशिष्ट का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि जीएमडीए ने एक आसान और पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है, जिसके माध्यम से नागरिक, संस्थान, ठेकेदार और डेवलपर्स अपनी आवश्यकता के अनुसार पुनः उपयोग योग्य सीएंडडी वेस्ट नि:शुल्क प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे अच्छी गुणवत्ता वाली उपयोगी सामग्री बेकार नहीं जाएगी और उसका दोबारा उपयोग हो सकेगा।
उन्होंने बताया कि पोर्टल को शुरुआती दिनों में ही अच्छा प्रोत्साहन मिला है और अधिक से अधिक नागरिक इस पहल का लाभ उठाने में रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों, संस्थानों, ठेकेदारों और डेवलपर्स से अधिक से अधिक संख्या में पोर्टल का उपयोग करने और अपनी जरूरत के अनुसार पुनः उपयोग योग्य निर्माण सामग्री नि:शुल्क प्राप्त करने की अपील की।
यह पोर्टल हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। इच्छुक व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर से https://gmda.gov.in/gmdawaste/ पर पंजीकरण कर पुनः उपयोग स्थल और वाहन की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद क्यूआर कोड युक्त अनुमति पत्र ऑनलाइन जारी किया जाता है, जिसके आधार पर सेक्टर-72 स्थित बेहरामपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पास बने जीएमडीए के सीएंडडी वेस्ट संग्रह केंद्र से सामग्री प्राप्त की जा सकती है। उपयोगकर्ता पोर्टल पर अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं और अनुमति पत्र डाउनलोड भी कर सकते हैं।
जीएमडीए ने नागरिकों और संस्थानों से इस पोर्टल का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा है कि निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के दोबारा उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, लैंडफिल पर भार कम होगा और स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा मिलेगा।









