पेपर लीक मामलों पर जवाबदेही तय करने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन रोकने की मांग
गुरुग्राम, 18 जुलाई। सेंटर फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स एंड सेक्युलरिज्म (सीपीडीआरएस), गुरुग्राम ने देशभर में नीट सहित विभिन्न भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने कहा कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से करोड़ों छात्रों और युवाओं का भविष्य संकट में पड़ गया है तथा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
सीपीडीआरएस ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलन जारी है। आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने तथा पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
संगठन ने यह भी कहा कि पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपने साथियों के साथ लगभग 20 दिनों तक आमरण अनशन पर रहे। संगठन के अनुसार, आंदोलनकारियों की मांगों पर संवाद स्थापित करने के बजाय उन्हें बलपूर्वक हटाना लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत है।
सीपीडीआरएस का कहना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनने और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। संगठन ने आरोप लगाया कि देशभर में पेपर लीक की अनेक घटनाओं के बावजूद शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय नहीं की जा रही है, जिससे युवाओं में असंतोष और अविश्वास बढ़ रहा है।
संगठन की प्रमुख मांगें
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग कर पारदर्शी एवं जवाबदेह परीक्षा प्रणाली लागू की जाए।
- पेपर लीक के सभी मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
- प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कानूनी एवं प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जाए।
सीपीडीआरएस ने बताया कि इन मांगों के समर्थन में 19 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित गालिब इंस्टीट्यूट हॉल, माता सुंदरी कॉलेज के निकट एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में विभिन्न सामाजिक, छात्र, युवा, शिक्षक एवं लोकतांत्रिक संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेकर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।








