हरियाणा में व्यावसायिक शिक्षा ने पकड़ी रफ्तार, दोगुना होगा विस्तार

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भविष्य की तकनीकों से रूबरू होंगे विद्यार्थी, सरकारी स्कूलों में शुरू होंगे एआई और फिनटेक जैसे विषय

मुख्य सचिव ने की समग्र शिक्षा योजना की समीक्षा, जिलों में 100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश

चंडीगढ़, 18 जुलाई-हरियाणा सरकार सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा का दायरा दोगुना करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी (फिनटेक) जैसे आधुनिक विषय शुरू करने तथा डिजिटल एवं कौशल आधारित शिक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर रोजगार एवं उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना है।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां समग्र शिक्षा योजना की समीक्षा बैठक में इस संबंध में तैयार कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में प्रदेश के सभी जिलों के उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को शिक्षा सुधारों के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और उद्योगोन्मुखी कौशल उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में 100 फीसदी नामांकन सुनिश्चित करने तथा विद्यार्थियों के लर्निंग आउटकम में सुधार लाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री विजय सिंह दहिया ने बताया कि सरकार ने प्रथम चरण में 306 अतिरिक्त सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इससे वर्ष 2026-27 में माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों में व्यावसायिक शिक्षा की पहुंच 31 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो जाएगी। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य राज्य के सभी सरकारी माध्यमिक एवं वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों तक इस कार्यक्रम का विस्तार करना है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में संचालित 15 व्यावसायिक क्षेत्रों के अतिरिक्त विभाग द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी (फिनटेक) जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को उभरती प्रौद्योगिकियों का शुरुआती ज्ञान मिलेगा और भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए वे बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगे।

बैठक में बताया गया कि व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान 1,382 सरकारी विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक के लगभग 1.58 लाख विद्यार्थियों को कार्यशालाओं, इंटर्नशिप, परियोजनाओं तथा कौशल मेलों के माध्यम से व्यावसायिक शिक्षा से परिचित कराया गया। वहीं माध्यमिक स्तर पर 1,398 सरकारी विद्यालयों में 2.13 लाख विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें से लगभग 45 प्रतिशत विद्यार्थियों ने कौशल आधारित पाठ्यक्रमों का चयन किया है।

राज्य परियोजना निदेशक श्री स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने बताया कि हरियाणा बहुभाषी शिक्षा को भी बढ़ावा दे रहा है। वर्तमान में 26 सरकारी स्कूलों में लगभग 4,000 विद्यार्थियों को फ्रेंच भाषा पढ़ाई जा रही है, जबकि अगले चरण में सरकारी स्कूलों में जर्मन भाषा भी शुरू करने का प्रस्ताव है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार स्कूलों की जिला स्तर पर निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में स्कूल शिक्षा की समग्र निगरानी एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एडीसी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, डिजिटल सुविधाओं के रखरखाव, स्वच्छता, शिक्षण गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं अनुशासन के साथ-साथ निर्माण कार्यों और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की समयबद्ध प्रगति की निगरानी करेंगे। इससे जिला स्तर पर प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित होगा और सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार आएगा।

उन्होंने बताया कि यू-डाइस 2025-26 के अनुसार स्कूल नामांकन के मामले में हरियाणा राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। राज्य का माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 94 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 81.5 प्रतिशत है। इसी प्रकार उच्च माध्यमिक स्तर पर जीईआर 79 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 61.7 प्रतिशत है। विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क परिवहन, साइकिल वितरण तथा विद्यार्थी परिवहन सुरक्षा योजना जैसी पहलें खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाने में सहायक हो रही हैं।

स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वर्ष 2026-27 में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2,000 किशोरों की पहचान की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा शुल्क एवं स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए 40 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग इस दिशा में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। साथ ही स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों को पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए शिक्षकों द्वारा परामर्श भी दिया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक जिले में एक सरकारी स्कूल को व्यावसायिक एवं लचीली शिक्षा (फ्लेक्सिबल लर्निंग) के मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव को अवगत कराया गया कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में बिजली, सुरक्षित पेयजल तथा छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालयों की 100 फीसदी उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है। लगभग 99 प्रतिशत स्कूल स्मार्ट कक्षाओं, आईसीटी प्रयोगशालाओं, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा स्टेम (एसटीईएम) सुविधाओं सहित डिजिटल आधारभूत संरचना से सुसज्जित हैं।

बैठक में राज्य सरकार द्वारा शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए संचालित 218 मॉडल संस्कृति स्कूलों, 251 पीएम श्री विद्यालयों, 250 मुख्यमंत्री उत्कृष्टता प्रोत्साहन विद्यालयों, 500 विद्यार्थियों तक विस्तारित सुपर-100 कार्यक्रम तथा मिशन बुनियाद की भी समीक्षा की गई।

इसके अलावा हॉलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड,  सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) ढांचे के अंतर्गत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा सरकारी विद्यालयों में गुणवत्ता मूल्यांकन एवं शैक्षणिक निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए स्कूल एक्रेडिटेशन हरियाणा (सच) पोर्टल के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।

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Author: Bharat Sarathi

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