गुरुकुल में आर्य वीरांगना दल के प्रान्तीय शिविर का भव्य समापन

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बेटियों का जन्म सौभाग्य बनें : डाॅ. राजेन्द्र विद्यालंकार।

प्रधान राजकुमार गर्ग ने सभी अतिथियों का स्मृति-चिन्ह भेंट कर अभिनन्दन किया।

थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 6 जून : आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा और गुरुकुल कुरुक्षेत्र के वेद प्रचार विभाग के संयुक्त तत्वाधान में गुरुकुल परिसर में लगे आर्य वीरांगना दल का प्रान्तीय जीवन निर्माण शिविर का आज भव्य समापन हुआ। सभा के महामंत्री विजयपाल आर्य समारोह के मुख्य अतिथि तथा विख्यात वैदिक विद्वान् डाॅ. राजेन्द्र विद्यालंकार जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सार्वदेशिक आर्य वीरांगना दल की प्रधान संचालिका श्रीमती व्रतिका आर्या, आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द, गुरुकुल के प्राचार्य सूबेप्रताप, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, वरिष्ठ भजनोपदेशक जयपाल आर्य, जसविन्द्र आर्य, मोहनलाल आर्य सहित शिविर में अहम भूमिका निभा रही सभी शिक्षिकाएं भी समारोह में मौजूद रहीं। शिविर के दौरान 100 आर्य वीरांगनाओं ने साप्ताहिक यज्ञ का प्रण लिया जिन्हें गुरुकुल प्रबंधक समिति द्वारा हवन-कुंड और वैदिक साहित्य देकर सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सभा के महामंत्री श्री विजयपाल आर्य ने कहा कि आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा और गुरुकुल कुरुक्षेत्र का यह संयुक्त प्रयास अत्यंत सराहनीय है। इस जीवन निर्माण शिविर का उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाना नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी बेटियों को राष्ट्र रक्षा के लिए तैयार करना है। आज देश को ऐसी ही सशक्त और निर्भीक वीरांगनाओं की आवश्यकता है जो आत्मरक्षा के साथ-साथ राष्ट्र की संस्कृति की रक्षा भी कर सकें।

विशिष्ट अतिथि एवं विख्यात वैदिक विद्वान् डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार ने कहा कि आज इन बेटियों का पराक्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास देखकर हृदय अत्यंत हर्षित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय, चुनौतियों का समय है। बालिकाओं को अच्छे संस्कार देना बेहद आवश्यक है ताकि वे अपने माता-पिता और परिवार का गौरव बने। उन्होंने बालिकाओं से आह्वान किया कि वे जीवन में सही निर्णय लें, हमेशा सही रास्ते का चुनाव करे, ऐसा कोई कदम न उठाए। उन्होंने कहा कि कठोर अनुशासन और अच्छे रास्ते की पहचान करना जीवन में आगे बढ़ने का मूलमंत्र है। शिविर में सिखायी गई अच्छी बातों को अपने जीवन में आत्मसात करें और दूसरों के जैसा नहीं बल्कि दूसरों को अपने जैसा अच्छा बनने के लिए प्रेरित करें।

महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने जिस सशक्त, विदुषी और स्वावलंबी नारी की कल्पना की थी, आज इस शिविर के माध्यम से वह धरातल पर साकार होती दिख रही है। आर्य वीरांगना दल केवल शारीरिक प्रशिक्षण का केंद्र नहीं है, बल्कि यह हमारी बेटियों के भीतर के आत्मबल को जगाने का पावन अनुष्ठान है।

आज के युग में जहाँ पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में युवा पीढ़ी संस्कारों से दूर हो रही है, वहीं गुरुकुल कुरुक्षेत्र के आँगन में बेटियाँ लाठी, कराटे और योगासनों के साथ-साथ वैदिक मूल्यों को आत्मसात कर रही हैं। एक वीरांगना जब सशक्त होती है, तो वह केवल अपना नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करती है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यहाँ से संस्कारित होकर जा रही ये वीरांगनाएँ समाज में व्याप्त कुरीतियों और अन्याय के खिलाफ एक ढाल बनकर खड़ी होंगी।

मुख्य शिक्षिका सुमेधा आर्या और उनकी पूरी टीम ने जिस लगन से इन बालिकाओं को तराशा है, वह आज इनके प्रदर्शन में साफ झलक रहा है। मैं सभी अभिभावकों को भी बधाई देता हूँ जिन्होंने अपनी बेटियों को इस शिविर में भेजकर उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया। आर्य प्रतिनिधि सभा बेटियों के उत्थान और वैदिक प्रचार-प्रसार के ऐसे कार्यों के लिए सदैव तत्पर और प्रतिबद्ध रहेगी।

मुख्य शिक्षिका सुमेधा आर्या के नेतृत्व में आर्य वीरांगनाओं ने सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, सर्वांग सुन्दर व्यायाम, पी.टी., योगासन, स्तूप निर्माण, लाठी, लेजियम, डम्बल, कराटे आदि का शानदार प्रदर्शन किया जिसे पंडाल में उपस्थित सभी अतिथियों एवं अभिभावकों ने खूब सराहा। समारोह में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा सभी शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। अन्त में गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग ने शिविर के सफल समापन पर सभी को बधाई दी और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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Author: Bharat Sarathi

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