-नवकल्प फाउंडेशन, आरडब्ल्यूए और रोटरी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में हुआ आयोजन

गुरुग्राम। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सेक्टर-15 पार्ट-1 स्थित झाड़सा बांध, रोज गार्डन, लक्ष्मी बाई पार्क व अन्य पार्कों में एक विशेष पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पहल रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), नवकल्प फाउंडेशन और रोटरी क्लब ऑफ गुडग़ांव के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना और पक्षियों के लिए एक सुरक्षित आवास व भोजन-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम के दौरान प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी को दोहराते हुए दाना-पानी नेस्ट अभियान को बड़े स्तर पर गति दी गई। इस अवसर पर रोटरी क्लब ऑफ गुडग़ांव के अध्यक्ष सुभाष सिंगला ने पर्यावरण सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि रोटरी क्लब सदैव ऐसी सार्थक और सकारात्मक पहलों के साथ खड़ा है। वहीं, नवकल्प फाउंडेशन के फाउंडर अनिल आर्य ने दाना-पानी नेस्ट की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, यह केवल एक लकड़ी का घोंसला नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के बीच खोते हुए उस अटूट रिश्ते को फिर से जोडऩे का एक संवेदनशील प्रयास है।
सामुदायिक एकजुटता आरडब्ल्यूए का सराहनीय योगदान
इस सार्थक पहल को धरातल पर उतारने में आरडब्ल्यूए सेक्टर-15 पार्ट-1 की सक्रिय भागीदारी रही। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष गौरव मंगला ने कहा, हमारे सेक्टर के निवासियों का उत्साह यह दर्शाता है कि सामुदायिक भागीदारी से पर्यावरण में बड़े और सकारात्मक बदलाव लाना संभव है। कार्यक्रम में मौजूद डॉ. विनीता यादव (उपाध्यक्ष आरडब्ल्यूए) ने वृक्षारोपण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसी पहल भविष्य के लिए एक सुरक्षित और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगी।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों और सदस्यों का भी सराहनीय योगदान रहा। आरडब्ल्यूए से गौरव मंगला (अध्यक्ष), डॉ. विनीता यादव (उपाध्यक्ष), भीम वासुदेव (कोषाध्यक्ष), ओम प्रकाश सेतिया (संयुक्त सचिव), अनिल गुप्ता, दीपक जैन, देवेश गुप्ता, जय प्रकाश, सुभाष देशवाल, महेश पंडितजी, पदम डागर, नितिन, पंकज, कुशल, वैभव, के बी तायल और दीपक ने इस अभियान में कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दिया। यह आयोजन स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और सामुदायिक एकजुटता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण को हरा-भरा रखने का संकल्प लिया।








