हरियाणा के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति सरकार के शिक्षा मॉडल की पोल खोलती है : कुमारी सैलजा

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चंडीगढ़ 4 जून । सिरसा लोकसभा क्षेत्र की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव कुमारी सैलजा ने हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की गंभीर कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के हजारों सरकारी विद्यालयों में शौचालय, बाउंड्री वॉल, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं तथा अन्य मूलभूत संसाधनों का अभाव है। रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश के 2,064 विद्यालयों में शौचालय मरम्मत योग्य स्थिति में हैं, 2,220 विद्यालयों की बाउंड्री वॉल जर्जर है तथा हजारों विद्यालयों में छात्राओं और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। सांसद ने कहा कि सरकार हर मंच से ई-लाइब्रेरी, स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल शिक्षा और कंप्यूटर एजुकेशन के दावे करती है, लेकिन जब विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं, तब ऐसे दावे केवल प्रचार तक सीमित दिखाई देते हैं। विशेष रूप से छात्राओं के लिए शौचालयों की कमी अत्यंत चिंताजनक विषय है, क्योंकि इससे उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।

कुमारी सैलजा ने कहा कि शिक्षा केवल तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता का नाम नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सबसे पहले विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का होना आवश्यक है। यदि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और चारदीवारी जैसी मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो शिक्षा के स्तर में सुधार की कल्पना नहीं की जा सकती। कुमारी सैलजा ने कहा कि यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि हरियाणा के सरकारी स्कूलों में सब कुछ ठीक नहीं है। सरकार को विज्ञापनों और दावों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत को स्वीकार करना चाहिए तथा विद्यालयों की आधारभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए।

कुमारी सैलजा ने मांग की कि प्रदेश सरकार सभी सरकारी विद्यालयों की व्यापक समीक्षा कर तत्काल प्रभाव से शौचालयों, बाउंड्री वॉल, दिव्यांग सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि नए शैक्षणिक सत्र से पहले विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

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Author: Bharat Sarathi

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