IDFC बैंक फ्रॉड से जुड़ाव की चर्चा, देर रात तबादलों के बाद बड़ा प्रशासनिक एक्शन

चंडीगढ़, 10 अप्रैल। हरियाणा सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी आदेशों में सस्पेंशन के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन इसे हाल ही में सामने आए IDFC बैंक से जुड़े कथित घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है।
निलंबित अधिकारियों में 2011 बैच के आईएएस प्रदीप कुमार और 2012 बैच के राम कुमार सिंह शामिल हैं।
प्रदीप कुमार वर्तमान में परिवहन विभाग में डायरेक्टर एवं विशेष सचिव के पद पर तैनात थे और उनकी सेवानिवृत्ति 30 जून 2026 को प्रस्तावित है, यानी वे महज ढाई महीने बाद रिटायर होने वाले थे। वहीं राम कुमार सिंह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव और पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) में अतिरिक्त CEO के पद पर कार्यरत थे।
IDFC बैंक मामले से जुड़ाव की चर्चा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई IDFC बैंक से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले से जुड़ी हो सकती है। मामले में जल्द ही सीबीआई जांच शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले सरकार तीन अन्य आईएएस अधिकारियों को भी साइडलाइन कर चुकी है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
सस्पेंशन के आदेश में क्या कहा गया
मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक, दोनों अधिकारियों को ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के तहत निलंबित किया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान दोनों का मुख्यालय चंडीगढ़ स्थित मुख्य सचिव कार्यालय की सर्विसेज-I शाखा रहेगा और उन्हें नियमानुसार सब्सिस्टेंस अलाउंस मिलेगा।
IAS सस्पेंशन के नियम: क्या होता है आगे?
प्रशासनिक मामलों के जानकारों के अनुसार:
- निलंबन की सूचना 48 घंटे के भीतर केंद्र सरकार को देना अनिवार्य होता है।
- 15 दिनों के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होती है।
- सस्पेंशन आदेश प्रारंभिक रूप से 30 दिनों तक वैध होता है, इसके बाद केंद्र की मंजूरी जरूरी होती है।
- सामान्यतः निलंबन 4 से 6 महीने तक बढ़ाया जा सकता है, जबकि भ्रष्टाचार के मामलों में यह अवधि दो वर्ष तक भी जा सकती है।
- निलंबित अधिकारी 30 दिनों के भीतर अपील कर सकता है।
तबादलों से भी जुड़ रहा मामला
इस कार्रवाई को बुधवार देर रात हुए 15 आईएएस अधिकारियों के बड़े फेरबदल से भी जोड़ा जा रहा है। कई वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों से हटाकर अपेक्षाकृत कम प्रभाव वाले पदों पर लगाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन विभागों के खाते IDFC बैंक में संचालित थे, उनसे जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है।
निष्कर्ष:
सरकार द्वारा बिना कारण बताए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड करना और उससे पहले बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल, यह संकेत देता है कि मामला गंभीर है। संभावित सीबीआई जांच के बीच आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।








