राव इन्द्रजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सड़कों की खराब गुणवत्ता और धीमी परियोजनाओं पर सवाल; वेदप्रकाश विद्रोही ने सरकार पर साधा निशाना
रेवाड़ी, 9 अप्रैल 2026: स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि रेवाड़ी जिले में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों में व्यापक भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि बुधवार को केन्द्रीय राज्यमंत्री राव इन्द्रजीत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में यह स्थिति उजागर हुई।
विद्रोही के अनुसार, बैठक के दौरान राव इन्द्रजीत सिंह ने अधिकारियों से सवाल किया कि हरियाणा में बनी सड़कें एक साल के भीतर ही क्यों उखड़ जाती हैं, जबकि अधिक वर्षा वाले राज्यों जैसे मेघालय और सिक्किम में सड़कें वर्षों तक टिकाऊ रहती हैं। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी अपने आप में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सड़कों, भवनों और अन्य निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी के कारण गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे परियोजनाएं समय से पहले ही जर्जर हो जाती हैं। विद्रोही ने कहा कि भाजपा शासन में भ्रष्टाचार और लूट अपने चरम पर है, जबकि सरकार जमीनी हकीकत से दूर दावे कर रही है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने यह भी कहा कि दिशा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि रेवाड़ी जिले में घोषित विकास कार्य बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। कई परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं और समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने विपक्ष के उस आरोप को सही ठहराया कि दक्षिणी हरियाणा के साथ विकास के मामले में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण परियोजनाएं या तो कछुआ गति से चल रही हैं या अधर में लटकी हुई हैं। “जब दिशा बैठक में ही ये तथ्य सामने आए हैं, तो विपक्ष के आरोपों को गलत कैसे ठहराया जा सकता है,” उन्होंने प्रश्न उठाया।
किसानों के मुद्दे पर विद्रोही ने कहा कि सरकार एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने का दावा करती है, लेकिन अहीरवाल क्षेत्र में गेहूं और सरसों की सरकारी खरीद नाममात्र हो रही है। इससे सरकार की कथनी और करनी के अंतर का पता चलता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश से गेहूं और सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन अभी तक विशेष गिरदावरी नहीं कराई गई है। ऐसे में किसानों को मुआवजा मिलने की संभावना भी कम हो गई है।








