गैस की बढ़ती कीमतों और किल्लत से मजदूरों का जीवन प्रभावित, पलायन को मजबूर; प्रशासन से कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की मांग
गुरुग्राम। एलपीजी गैस की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों और छोटे उद्यमियों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि रोजी-रोटी की तलाश में आए श्रमिक अब अपने गांवों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
आईडीसी के प्रधान धर्मसागर, उद्यमी सुनील दत्ता, विजय टंडन, देवेंद्र जैन, प्रवीण वर्मा और तरुण खन्ना ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को गैस उपलब्ध नहीं हो रही है। जो गैस पहले 50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से मिलती थी, वह अब 500 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है—वह भी बड़ी मुश्किल से।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन भले ही स्थिति सामान्य होने का दावा कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। गैस, पेट्रोल-डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।
झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, असम और ओडिशा जैसे राज्यों से आए दिहाड़ी मजदूरों के सामने जीवन यापन का संकट गहराता जा रहा है। मजदूरी का बड़ा हिस्सा केवल गैस भरवाने में ही खर्च हो रहा है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है।
धर्मसागर ने आरोप लगाया कि एक ओर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी ओर कुछ मुनाफाखोर तत्व इस संकट का फायदा उठाकर कालाबाजारी में जुटे हैं। सिलेंडर की बढ़ती कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं, जिसके चलते छोटे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट तक बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गैस की कालाबाजारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और ऊंचे दामों पर अवैध रूप से गैस बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।







