भारतीय उद्योग जगत को बचाने के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच जरूरी: योगेश मुंजाल

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मिडल ईस्ट तनाव से बढ़ा संकट, MSME और निर्यातकों के लिए राहत पैकेज की मांग तेज

गुरुग्राम (जतिन/राजा): पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बादलों और तनावपूर्ण हालात का असर अब भारतीय उद्योग जगत पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, ऊर्जा संकट और लॉजिस्टिक्स में आ रही बाधाओं ने औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इस बीच उद्योग जगत ने सरकार से त्वरित राहत की मांग उठाई है।

प्रख्यात उद्योगपति एवं मुंजाल शोवा के एमडी योगेश मुंजाल ने मौजूदा परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में सबसे अधिक मार छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) पर पड़ रही है। उन्होंने कहा कि मिडल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित हुई है और कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे उद्योगों के सामने गंभीर कैश-फ्लो संकट खड़ा हो गया है।

योगेश मुंजाल ने सरकार से मांग की कि उद्योगों को राहत देने के लिए 3 से 6 महीने तक लोन मोरेटोरियम लागू किया जाए, ताकि EMI का दबाव कम हो सके। इसके साथ ही वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज दरों में 2 से 3 प्रतिशत तक की छूट देने की भी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि लाल सागर क्षेत्र में संकट और समुद्री मार्गों में व्यवधान के चलते निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। माल समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहा है और शिपिंग लागत कई गुना बढ़ गई है। इससे निर्यात आधारित उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर भी असर पड़ रहा है।

इसके अलावा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे उद्योगों का मुनाफा लगातार घट रहा है। भुगतान में देरी और बढ़ती लागत के कारण उद्योगों के पास दैनिक संचालन के लिए नकदी की कमी भी गहराती जा रही है।

योगेश मुंजाल ने सुझाव दिया कि संकटग्रस्त उद्योगों के लिए NPA नियमों में अस्थायी ढील दी जाए और इनपुट टैक्स क्रेडिट या प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता के माध्यम से लागत का बोझ कम किया जाए। साथ ही निर्यातकों के लिए शिपिंग लागत पर विशेष सब्सिडी दी जानी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो बड़ी संख्या में छोटी और मध्यम इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के इंजन को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच की तत्काल आवश्यकता है, ताकि उद्योग जगत इस वैश्विक संकट से उबर सके।

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Author: Bharat Sarathi

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