एलपीजी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, लघु सचिवालय में 24×7 कंट्रोल रूम शुरू

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जिले में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति पूरी तरह सुचारू

गुरुग्राम, 31 मार्च। डीसी अजय कुमार ने बताया कि जिले में एलपीजी की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इस दिशा में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सघन अभियान चलाया जा रहा है, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और गैस की आपूर्ति पारदर्शी व व्यवस्थित बनी रहे।

डीसी ने कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाते हुए लघु सचिवालय के सेकंड फ्लोर स्थित एनआईसी रूम में एलपीजी सेवाओं से संबंधित एक समर्पित 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां आमजन गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता, आपूर्ति में देरी, कालाबाजारी या अवैध भंडारण जैसी समस्याओं की शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि हर शिकायत का त्वरित संज्ञान लेकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

डीएफएससी डॉ. अशोक रावत ने बताया कि कंट्रोल रूम के लैंडलाइन नंबर 0124-2868930 पर प्राप्त सभी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निवारण किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कालाबाजारी और अवैध भंडारण से जुड़ी शिकायतों पर संबंधित अधिकारी तत्काल जांच कर कार्रवाई करेंगे। आमजन से अपील की गई है कि यदि कहीं भी एलपीजी से जुड़ी कोई अनियमितता नजर आए तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सके।

एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक, नियमित निगरानी से स्थिति नियंत्रण में

डीएफएससी ने बताया कि डीसी अजय कुमार के दिशा-निर्देशन में जिले में एलपीजी गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए रोजाना 6 टीमें फील्ड में सक्रिय हैं, जो गैस एजेंसियों, गोदामों और संदिग्ध स्थानों पर लगातार निरीक्षण कर रही हैं। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत चिन्हित कर कार्रवाई संभव हो पा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिले में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। वर्तमान में 58 गैस एजेंसियों के पास कुल 15,311 सिलेंडर का भंडारण मौजूद है, जिससे आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। विभाग द्वारा आपूर्ति एवं वितरण की दैनिक आधार पर निगरानी की जा रही है, ताकि भविष्य में भी किसी प्रकार की किल्लत उत्पन्न न हो।

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Author: Bharat Sarathi

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