टोल टैक्स में 3 से 10% बढ़ोतरी पर विद्रोही का हमला, बोले—“वाहन चालकों की हो रही लूट”

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हर साल 1 अप्रैल से दरें बढ़ाना बना परंपरा, सरकार से खर्च का हिसाब मांगा

रेवाडी, 31 मार्च 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने टोल टैक्स दरों में 3 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की कड़ी आलोचना करते हुए इसे वाहन चालकों की “अनावश्यक लूट” करार दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी-भाजपा शासन आने के बाद हर वर्ष टोल दरें बढ़ाने का चलन शुरू हो गया है, जिससे आमजन की जेब पर लगातार बोझ डाला जा रहा है।

विद्रोही ने सवाल उठाया कि टोल टैक्स के नाम पर वसूला जा रहा भारी-भरकम धन आखिर खर्च कहां हो रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और नेशनल हाईवे अथॉरिटी इस पर स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं।

रोड टैक्स के बावजूद टोल क्यों?

उन्होंने कहा कि जब सरकार नए वाहनों पर पहले ही रोड टैक्स वसूल लेती है, तो फिर टोल टैक्स वसूली का औचित्य क्या है। वर्ष 2026 में भी 1 अप्रैल से टोल दरों में वृद्धि कर दी गई है, जिससे हर वाहन चालक को एक बार टोल पार करने पर 5 से 15 रुपये अतिरिक्त देने होंगे, जबकि आने-जाने पर यह खर्च 10 से 30 रुपये तक बढ़ जाएगा।

विद्रोही के अनुसार, इस बढ़ोतरी से एक वाहन चालक पर हर महीने लगभग 300 से 1000 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा।

हाईवे की बदहाल स्थिति पर उठाए सवाल

विद्रोही ने आरोप लगाया कि देशभर के नेशनल हाईवे की हालत खराब है। सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हैं, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर बिजली व्यवस्था खराब होने के कारण रात में अंधेरे में सफर करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि टूटी सड़कों की समय पर मरम्मत नहीं होती और हाईवे के साथ बनी सर्विस लेन की स्थिति तो और भी खराब है, जिनकी वर्षों तक सुध नहीं ली जाती।

टोल वसूली में अनियमितता के आरोप

विद्रोही ने यह भी आरोप लगाया कि कई टोल प्लाजा निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर लगाए गए हैं, जो पूरी तरह गैरकानूनी हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता के दुरुपयोग से सुनियोजित तरीके से टोल लगाकर वाहन चालकों को लूटा जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि टोल वसूली से जुड़े निजी कंपनियां और सत्तारूढ़ दल के नेता इस व्यवस्था से लाभ कमा रहे हैं, जबकि आम जनता की सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।

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Author: Bharat Sarathi

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