घोषणाओं और वास्तविक खर्च में भारी अंतर, विकास बजट घटने का जताया अंदेशा
रेवाड़ी, 2 मार्च 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को आंकड़ों की बाजीगरी करार दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 2,23,658.17 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए इसे वर्ष 2025-26 की तुलना में 10.82 प्रतिशत अधिक बताया है, जबकि यह वृद्धि संशोधित बजट के आधार पर दर्शाई गई है।
विद्रोही ने कहा कि वर्ष 2025-26 में 2,05,017.29 करोड़ रुपये का मूल बजट प्रस्तुत किया गया था। यदि उसी आधार पर तुलना की जाए तो वर्ष 2026-27 का बजट वृद्धि मात्र लगभग 9 प्रतिशत बैठती है। उनका आरोप है कि संशोधित अनुमान के बाद वास्तविक वृद्धि घटकर 6-7 प्रतिशत ही रह जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2025-26 में भी वर्ष 2024-25 की तुलना में 13.7 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया गया था, जो बाद में सही साबित नहीं हुआ।
विकास बजट पर सवाल
विद्रोही ने कहा कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 में 28,205 करोड़ रुपये के पूंजीगत (विकास) बजट की घोषणा की है, जबकि वर्ष 2025-26 में यह 20,517 करोड़ रुपये था। वर्ष 2024-25 में 16,907 करोड़ रुपये का प्रावधान घोषित किया गया था, जो बाद में घटकर 15,642 करोड़ रुपये रह गया। अंतिम वास्तविक आंकड़ों में यह राशि मात्र 12,840 करोड़ रुपये रही—जो घोषित बजट से लगभग 25 प्रतिशत कम थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनावी वर्ष में विकास बजट की यह स्थिति रही, तो सामान्य वर्ष में वास्तविक खर्च और कम रहने की आशंका है।
रेवाड़ी जिला अस्पताल पर उठाए प्रश्न
विद्रोही ने बजट भाषण में रेवाड़ी जिला अस्पताल को 200 से 300 बेड का करने की घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में 100 बेड का अस्पताल अभी तक 200 बेड का भी नहीं बन पाया है और इसके लिए भूमि तक अधिग्रहित नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि जब 200 बेड की व्यवस्था ही अस्तित्व में नहीं है तो 300 बेड की घोषणा किस आधार पर की जा रही है।
सीवर लाइन और पेयजल योजनाओं पर भी सवाल
उन्होंने कहा कि 150 किलोमीटर नई सीवर लाइन की घोषणा पिछले कई बजटों में दोहराई जाती रही है, लेकिन जमीन पर इसका असर दिखाई नहीं देता। इसी प्रकार हर छात्र को डेस्क उपलब्ध कराने की घोषणा पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग दो लाख डेस्क की कमी है।
रेवाड़ी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों से वाटर टैंक निर्माण के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन भूमि उपलब्ध न होने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पाई है।
कर्ज और न्यूनतम वेतन पर टिप्पणी
विद्रोही ने कहा कि प्रदेश पर कर्ज जीडीपी का लगभग 28 प्रतिशत हो चुका है और इसके और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में बजट घाटा कम करने का दावा वास्तविकता से परे है।
उन्होंने न्यूनतम वेतन 11,257 रुपये से बढ़ाकर 15,200 रुपये किए जाने की संभावना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह राशि वर्तमान महंगाई के अनुरूप पर्याप्त है?
हालांकि, कृषि नलकूपों के लिए अलग से तीसरी एग्रो बिजली वितरण निगम बनाने की घोषणा का उन्होंने स्वागत किया।
अंत में विद्रोही ने कहा कि मुख्यमंत्री का तीन घंटे दस मिनट का बजट भाषण आंकड़ों की प्रस्तुति तक सीमित रहा। उनके अनुसार इस बजट से न तो अपेक्षित विकास होगा, न रोजगार सृजन होगा और न ही शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पेयजल ढांचे में ठोस सुधार दिखाई देगा। उन्होंने आशंका जताई कि घोषित 28,205 करोड़ रुपये का विकास प्रावधान भी घटकर 15-20 हजार करोड़ रुपये तक सीमित हो सकता है।









