– जनवरी 2024 में 44.99 लाख से मार्च 2025 में 52.50 लाख तक बढ़े कार्ड, जनवरी 2026 में घटकर 39.88 लाख
– एससी, एसटी, बीसी, दिहाड़ी मजदूरों, विधवाओं व अनाथों के कार्ड पीपीपी त्रुटियों के आधार पर काटने का आरोप
चंडीगढ़, 27 फरवरी। सिरसा से सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने हरियाणा में बीपीएल राशन कार्डों की संख्या में आई भारी कमी को लेकर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
उन्होंने जारी बयान में कहा कि राज्य सरकार के सामने आए आंकड़े अत्यंत चिंताजनक हैं और यह गरीब परिवारों के साथ अन्याय की ओर संकेत करते हैं। उनके अनुसार जनवरी 2024 में प्रदेश में 44.99 लाख बीपीएल राशन कार्ड थे, जो मार्च 2025 में बढ़कर 52.50 लाख हो गए, लेकिन जनवरी 2026 तक यह संख्या घटकर 39.88 लाख रह गई।
सैलजा ने कहा कि लगभग 24 प्रतिशत की यह कमी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश में गरीबी इतनी तेजी से कम हुई है या फिर पात्र परिवारों को प्रशासनिक कारणों से सूची से बाहर कर दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एससी, एसटी, बीसी वर्गों, दिहाड़ी मजदूरों, विधवाओं और अनाथों के राशन कार्ड परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में कथित त्रुटियों के आधार पर काटे गए हैं।
सैलजा ने कहा कि गरीब परिवारों के लिए राशन जीवन का आधार है। यदि पात्र लोगों को योजनाओं से वंचित किया गया है तो यह उनके अधिकारों का सीधा हनन है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि बीपीएल राशन कार्डों में हुई कटौती पर श्वेत पत्र जारी किया जाए, अपील के बाद बहाल किए गए कार्डों का विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा परिवार पहचान पत्र और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों के कार्ड गलत आंकड़ों या डेटा त्रुटियों के कारण काटे गए हैं, उनकी शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सफाई पर लाखों खर्च, ज़मीन पर कूड़ा
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने फतेहाबाद में सफाई व्यवस्था को लेकर सामने आए मामले पर भी प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं तो यह बेहद चिंताजनक है। जनता के धन का दुरुपयोग किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
सैलजा ने कहा कि यदि कागजों में खर्च दर्शाया गया है और ज़मीनी स्तर पर परिणाम नजर नहीं आ रहे, तो पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में प्रमुखता से उठाया गया था और उपायुक्त को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।









