होलाष्टक काल में शुरू सत्र, 2 मार्च का बजट बनेगा राजनीतिक परीक्षा
सदन में तीखी बहस, सड़क पर आंदोलन की तैयारी
बजट से पहले विपक्ष आक्रामक, सरकार के लिए संतुलन की चुनौती
ऋषिप्रकाश कौशिक
गुरुग्राम, 25 फरवरी 2026। हरियाणा की राजनीति इन दिनों ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां परंपरा और सत्ता—दोनों समानांतर चलती हुई प्रतीत होती हैं। एक ओर सनातन परंपरा के अनुसार होलाष्टक का आरंभ हो चुका है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से उग्र ग्रह स्थिति का काल माना जाता है; वहीं दूसरी ओर प्रदेश का विधानसभा सत्र भी इसी अवधि में प्रारंभ हुआ है। मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों को टालने की परंपरा रही है, क्योंकि निर्णयों में बाधाएं, असहमति और टकराव की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
लेकिन इस बार परिस्थितियां परंपरा से अलग दिशा में जाती दिखाई दे रही हैं। हरियाणा विधानसभा का सत्र इसी काल में शुरू हुआ है और 2 मार्च को वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाना प्रस्तावित है, जिसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सदन में पेश करेंगे। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है—क्या यह बजट केवल वित्तीय दस्तावेज रहेगा या राजनीतिक विश्वास मत का संकेत भी बनेगा?
सदन की शुरुआत से ही गरमाया माहौल
सत्र के पहले ही दिन से सदन में तल्खी देखने को मिली। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई गंभीर मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई। विशेष रूप से जिन विषयों ने राजनीतिक पारा चढ़ाया, उनमें शामिल हैं—
- प्रदेश में कथित रूप से बिगड़ती प्रशासनिक व्यवस्था
- बढ़ती गुंडागर्दी और कानून-व्यवस्था पर सवाल
- आईडीएफसी बैंक से जुड़े कथित 590 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के फ्रॉड का मामला
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत विपक्ष के अन्य सदस्यों ने सरकार को आक्रामक अंदाज़ में घेरा। बहस के दौरान कई बार मुख्यमंत्री को प्रतिपक्ष के सवालों का सीधा सामना करना पड़ा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार प्रशासनिक नियंत्रण खो चुकी है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक निराशा की उपज बता रहा है।
सड़क से सदन तक संघर्ष की रणनीति
राजनीतिक तापमान को और बढ़ाते हुए हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र यादव ने 25 फरवरी को विधानसभा घेराव का आह्वान किया है। यह स्पष्ट संकेत है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल सदन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि जनता के बीच ले जाकर राजनीतिक दबाव बनाना चाहती है।
यदि घेराव कार्यक्रम व्यापक समर्थन जुटाता है, तो यह सरकार के लिए बजट सत्र से पहले असहज स्थिति पैदा कर सकता है। वहीं यदि सरकार स्थिति को नियंत्रित रखती है, तो वह इसे अपनी प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण बताने का प्रयास करेगी।
बजट: आर्थिक दस्तावेज या राजनीतिक कसौटी?
2 मार्च को प्रस्तुत होने वाला 2026-27 का बजट कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
- ग्रामीण और कृषि क्षेत्र – किसान वर्ग को राहत या नई योजनाओं की घोषणा राजनीतिक संदेश दे सकती है।
- शहरी विकास और रोजगार – युवाओं और मध्यम वर्ग को साधने का प्रयास होगा।
- कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार – विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए बजट में प्रावधानों की संभावना।
इस समय बजट केवल आय-व्यय का विवरण नहीं रहेगा, बल्कि यह सरकार की राजनीतिक दिशा और प्राथमिकताओं का संकेतक भी बनेगा। यदि बजट जनहितकारी और संतुलित माना गया, तो सरकार विपक्ष के आक्रामक रुख को कुछ हद तक शांत कर सकती है। अन्यथा, यह टकराव और तेज हो सकता है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की हल्की छाया
राष्ट्रीय स्तर पर भी इन दिनों संसद—लोकसभा और राज्यसभा—में विभिन्न मुद्दों को लेकर गतिरोध देखने को मिला है। ऐसे वातावरण में राज्यों की विधानसभाओं में भी राजनीतिक आक्रामकता का बढ़ना अस्वाभाविक नहीं है।
हालांकि हरियाणा की परिस्थिति मुख्यतः प्रदेशीय मुद्दों पर केंद्रित है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव वातावरण को और संवेदनशील बना देता है। विपक्ष की रणनीति अक्सर राष्ट्रीय मुद्दों से प्रेरित होकर राज्य स्तर पर भी तेज होती दिखाई देती है।
परंपरा बनाम राजनीति
होलाष्टक को लेकर प्रचलित मान्यताओं में निर्णयों को टालने और संयम बरतने की सलाह दी जाती है। किंतु राजनीति में समय और अवसर की अपनी गणना होती है। सत्ता और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए इस काल को भी रणनीतिक रूप से उपयोग कर रहे हैं।
यदि प्रारंभिक संकेतों को देखें, तो यह सत्र सामान्य नहीं रहने वाला। बहस की तीव्रता, सड़क पर आंदोलन की तैयारी और बजट की निकटता—ये सभी संकेत देते हैं कि आने वाले दिन हरियाणा की राजनीति के लिए निर्णायक हो सकते हैं।
निष्कर्ष
होलाष्टक के बीच शुरू हुआ यह सत्र परंपरा और राजनीति के प्रतीकात्मक टकराव जैसा प्रतीत होता है। एक ओर धार्मिक मान्यता का संयमित संदेश, दूसरी ओर लोकतांत्रिक व्यवस्था में तीखी बहस और विरोध का अधिकार।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के लिए यह समय प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक संतुलन दोनों की परीक्षा है। वहीं विपक्ष के लिए यह अवसर है कि वह अपनी धार को जनता के मुद्दों से जोड़कर प्रभावी बनाए।
2 मार्च का बजट इस पूरे घटनाक्रम का केंद्रीय बिंदु होगा। यह तय करेगा कि होलाष्टक का यह राजनीतिक काल सरकार के लिए ग्रहण साबित होता है या अवसर।
आने वाले दिन निश्चित ही हरियाणा की राजनीति की दिशा तय करेंगे।








