राहुल गांधी को बोलने से रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं की हत्या, स्पीकर पर झूठ फैलाने और महिला सांसदों का अपमान करने का आरोप
रेवाडी, 6 फरवरी। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों की “जुगलबंदी” देश के लोकतंत्र को कटघरे में खड़ा कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर न देना भारतीय प्रजातांत्रिक इतिहास में अभूतपूर्व है और यह लोकतंत्र की आत्मा व संसदीय परंपराओं को कुचलने जैसा है।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि इसके बाद सुनियोजित तरीके से यह “महाझूठ” फैलाया गया कि प्रधानमंत्री मोदी को विपक्ष की महिला सांसदों से जान का खतरा था, इसलिए वे सदन में जवाब देने नहीं आए। उन्होंने कहा कि इस तरह का दावा न केवल स्पीकर पद की गरिमा को तार-तार करता है, बल्कि पूरी दुनिया में भारत के लोकतंत्र को उपहास का विषय बनाता है।
उन्होंने कहा कि यदि देश के प्रधानमंत्री को अपने ही साथी सांसदों से खतरा बताया जाता है, तो यह सरकार की अलोकप्रियता और नेतृत्व की विफलता को दर्शाता है। विद्रोही ने आरोप लगाया कि विपक्ष, विशेषकर महिला सांसदों को अराजक और हिंसक बताकर लोकसभा आसन की मर्यादा को ठेस पहुंचाई गई है।
विद्रोही ने कहा कि अपनी राजनीतिक असफलताओं को छिपाने और विपक्ष को बदनाम करने के लिए अगर सत्ता पक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख दांव पर लगा रहा है, तो यह बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में “संघी फासीवाद” थोपने की कोशिशें हो रही हैं और जनता को इसे समझना होगा।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए लोगों को सड़कों पर उतरकर ऐसी “फासीवादी ताकतों” का विरोध करना चाहिए। विद्रोही ने कहा कि यदि अब भी जनता नहीं जागी, तो देश में लोकतंत्र कमजोर पड़ सकता है।








