गुरुग्राम कांग्रेस में गुटबाज़ी पर सख्ती, जिला अध्यक्षों और पीएल कटारिया को अनुशासनिक नोटिस

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कुमारी शैलजा की तस्वीर हटाने के विवाद से मामला थाने तक पहुंचा, पार्टी छवि को नुकसान पर जवाब-तलब

गुरुग्राम: गुरुग्राम कांग्रेस एक बार फिर आंतरिक गुटबाज़ी को लेकर चर्चा में है। कांग्रेस स्थापना दिवस (28 दिसंबर 2025) पर कुमारी शैलजा की तस्वीर हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। बढ़ते विवाद और पुलिस तक मामला पहुंचने के बाद कांग्रेस के अनुशासनिक विभाग ने शहरी जिला अध्यक्ष पंकज डावर, ग्रामीण जिला अध्यक्ष वर्धन यादव और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पीएल कटारिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

बताया जाता है कि पीएल कटारिया ने कुमारी शैलजा के जन्मदिन पर कांग्रेस कार्यालय में उनकी तस्वीर लगवाई थी, लेकिन स्थापना दिवस के दिन वह तस्वीर कार्यालय में नहीं मिली। पूछताछ में यह बात सामने आई कि जिला अध्यक्ष पंकज डावर के निर्देश पर तस्वीर हटा दी गई थी। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई, जिसने पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को उजागर कर दिया।

विवाद के बाद शहरी और ग्रामीण जिला अध्यक्षों की ओर से पीएल कटारिया को संयुक्त नोटिस भेजा गया, लेकिन इससे मामला शांत होने के बजाय और बढ़ गया। बाद में यह मुद्दा मीडिया तक पहुंचा, जिससे पार्टी की छवि प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

इस बीच, अनुसूचित जाति समाज की कुछ संस्थाओं ने भी इस प्रकरण पर आपत्ति जताई और पीएल कटारिया से संपर्क किया। इसके बाद कटारिया द्वारा जारी एक वीडियो को पंकज डावर ने चेतावनी के बजाय धमकी के रूप में लिया और शिवाजी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। इससे संगठन में यह संदेश गया कि आंतरिक मतभेद अब पुलिस तक पहुंच रहे हैं, जो पार्टी अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।

अनुशासनिक विभाग ने अपने नोटिस में पूछा है कि कार्यालय में हुआ विवाद सार्वजनिक क्यों किया गया, मीडिया में इसे क्यों उछाला गया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से पहले पार्टी नेतृत्व को सूचित क्यों नहीं किया गया। साथ ही यह भी जानना चाहा गया है कि छोटे स्तर के विवाद को इतना बढ़ने क्यों दिया गया।

इधर, पार्टी जहां देशभर में मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर अभियान चला रही है, वहीं गुरुग्राम में ऐसे कार्यक्रमों की सक्रियता कम नजर आने की चर्चा भी हो रही है। इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि गुरुग्राम की स्थिति के बारे में जिला अध्यक्ष ही बेहतर बता सकते हैं। संगठन में नए और पुराने कार्यकर्ताओं को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी लेकर आगे उचित कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय स्तर पर कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि संगठन बनने के बाद अपेक्षित एकजुटता दिखाई नहीं दे रही और नियुक्तियों को लेकर भी असंतोष है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पदाधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कुल मिलाकर, हालिया घटनाक्रम ने गुरुग्राम कांग्रेस के भीतर समन्वय और अनुशासन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। अब सभी की नजरें अनुशासनिक विभाग की आगामी कार्रवाई और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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