बजट 2026-27: भारत की आर्थिक दिशा, टैक्स सुधार और मिडिल क्लास की उम्मीदों का निर्णायक पड़ाव

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भारत से लेकर वैश्विक निवेशकों तक, क्यों टिकी हैं सभी की निगाहें इस बजट पर

किशन सनमुखदास भावनानी

गोंदिया। वैश्विक मंच पर भारत का आम बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक सोच, सामाजिक प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय भूमिका को परिभाषित करने वाला नीति-दस्तावेज़ होता है। केंद्रीय बजट 2026-27 इस दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह न केवल एक नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करेगा, बल्कि 60 वर्ष पुराने आयकर कानून के स्थान पर लागू होने जा रहे नए इन्कम टैक्स एक्ट 2025 से पहले का अंतिम पूर्ण बजट भी होगा।

यही कारण है कि संसद से लेकर शेयर बाजार तक, टैक्सपेयर्स से लेकर उद्योग जगत तक और भारत से लेकर वैश्विक निवेशकों तक—सभी की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं।

बजट सत्र: लोकतंत्र में जवाबदेही की कसौटी

मैं, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी (गोंदिया, महाराष्ट्र), यह स्पष्ट करना चाहूँगा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट का औपचारिक आगाज़ संसद के बजट सत्र के साथ होगा, जिसे 28 जनवरी से 2 अप्रैल 2026 तक आयोजित करने की मंजूरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दी जा चुकी है।

यह सत्र दो चरणों में होगा—

  • पहला चरण: 28 जनवरी से 13 फरवरी
  • दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल

इस विस्तारित सत्र का उद्देश्य केवल बजट पारित करना नहीं, बल्कि उससे जुड़ी नीतियों, संशोधनों और विधायी पहलुओं पर व्यापक और सार्थक विमर्श सुनिश्चित करना है। लोकतंत्र में बजट सत्र सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता की सबसे बड़ी कसौटी होता है।

1 फरवरी 2026: वित्त मंत्री से बड़ी अपेक्षाएँ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। यह बजट इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इसमें उनसे—

  • राजकोषीय अनुशासन
  • मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग को राहत
  • किसानों और स्टार्टअप्स को समर्थन
  • उद्योग जगत के लिए स्थिर नीति संकेत

—इन सभी के बीच संतुलन साधने की अपेक्षा की जा रही है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में बजट के प्रत्येक प्रावधान का सीधा असर घरेलू मांग, निवेश वातावरण और वैश्विक भरोसे पर पड़ता है।

टैक्सपेयर्स की उम्मीदें: बजट का सबसे संवेदनशील पक्ष

हर बजट में यदि किसी वर्ग की निगाहें सबसे अधिक वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी होती हैं, तो वह है मिडिल क्लास और नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स
महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रिटायरमेंट की बढ़ती लागत के बीच यह वर्ग लंबे समय से यह महसूस करता आया है कि आर्थिक विकास का सबसे बड़ा बोझ उसी पर पड़ता है।

इसीलिए बजट 2026-27 में इनकम टैक्स से जुड़ी घोषणाएँ केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी होंगी।

बजट और शेयर बाजार: निवेशकों की धड़कन

बजट 2026-27 का असर आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार और पूंजी बाजार पर भी पड़ेगा।
स्टॉक एक्सचेंजों ने संकेत दिए हैं कि यदि 1 फरवरी को बजट रविवार के दिन पेश होता है, तो स्पेशल ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया जाएगा।

यह दर्शाता है कि—

  • टैक्स सुधार
  • पूंजीगत लाभ कर
  • टीडीएस नियम
  • निवेश प्रोत्साहन

जैसे प्रावधान बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025: एक युग का अंत, दूसरे की शुरुआत

यूनियन बजट 2026-27 को ऐतिहासिक बनाने वाला सबसे बड़ा कारण यह है कि यह 60 वर्ष पुराने आयकर कानून के अंत से पहले का अंतिम पूर्ण बजट होगा।
सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने जा रही है, जो मौजूदा जटिल और विवादग्रस्त कानून की जगह लेगा।

इसलिए यह बजट केवल वर्तमान वित्तीय जरूरतों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भविष्य के टैक्स सिस्टम की बुनियाद भी रखेगा।

टैक्सपेयर्स की 5 बड़ी उम्मीदें: क्या मिडिल क्लास को मिलेगी राहत?

1️⃣ धारा 80C और 80D की सीमा में वृद्धि
₹1.5 लाख की 80C सीमा वर्षों से अपरिवर्तित है, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। स्वास्थ्य बीमा पर 80D की छूट भी आज की चिकित्सा लागत के मुकाबले अपर्याप्त है।

2️⃣ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में राहत
एलटीसीजी टैक्स की मौजूदा संरचना छोटे निवेशकों को हतोत्साहित करती है। सीमा बढ़ाने या अतिरिक्त छूट से घरेलू निवेश और बाजार की गहराई बढ़ सकती है।

3️⃣ टीडीएस सीमा में वृद्धि
वरिष्ठ नागरिकों, फ्रीलांसर्स और छोटे करदाताओं के लिए कम टीडीएस सीमा नकदी प्रवाह में बाधा बनती है। सीमा बढ़ने से अनुपालन सरल होगा।

4️⃣ नया टैक्स कानून: सरल, स्पष्ट और डिजिटल-फ्रेंडली
कम धाराएँ, सरल भाषा और न्यूनतम विवाद—यही नए कानून से सबसे बड़ी अपेक्षा है।

5️⃣ टैक्स विवादों से मुक्ति
तेज़, पारदर्शी और तकनीक-आधारित विवाद समाधान तंत्र टैक्सपेयर्स के विश्वास को मजबूत करेगा।

निष्कर्ष

बजट 2026-27 केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि भारत आर्थिक सुधार, सामाजिक न्याय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मार्ग पर किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
मिडिल क्लास, निवेशक और उद्योग जगत—तीनों की उम्मीदें इस बजट से जुड़ी हैं। अब देखना यह है कि सरकार इन उम्मीदों को किस हद तक नीति में बदल पाती है।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

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Author: Bharat Sarathi

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