प्रदूषित राजनीति के कारण कोरोना काल में जनता परेशान

भारत सारथी/ऋषि प्रकाश कौशिक
गुरुग्राम। सारे हरियाणा में कोरोना के केस बढ़ते ही जा रहे हैं। गुरुग्राम की हालत तो बहुत ही खराब है। रोजाना मरीज बढ़ते हैं। लोगों में डर और असंतोष फैल रहा है। प्रशासन की ओर से क्या किया जा रहा है जनता को पता नहीं और राजनेता तो इस बारे में बोलने को तैयार नहीं।

गुरुग्राम पूरे हरियाणा का पेट भरने वाला जिला है। कमाऊ बेटे का तो मां भी सबसे अधिक ध्यान रखती है और अब जब धड़ाधड़ कोरोना मरीज यहां बढ़ रहे हैं तो भी सरकार की ओर से इसे रेड जोन बनाने की प्रक्रिया की ओर कोई इशारे दिखाई नहीं दे रहे। अर्थात सरकार को गुरुग्राम से रेवेन्यु चाहिए चाहे जनता मरती रहे।

गुरुग्राम में मरीज बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के पास कितने साधन हैं, व्यवस्थाओं में कहां कमी है, निगम शहर को सेनेटाइज क्यों नहीं कर पा रहा है, इन सभी बातों को सोचने के लिए गुरुग्राम के चुने नुमाइंदे विधायकों और गुरुग्राम को अपना घर समझने वाले मुख्यमंत्री और विभाग के मंत्री अनिल विज को समझ ही नहीं है, क्या समझा जाए? क्या इस अवस्था में यह इनका कार्य नहीं कि प्रशासन के पास जिन चीजों की कमी है, वे किसी भी प्रकार से उपलब्ध कराई जाए। हर चीज उपलब्ध हो सकती है, बशर्ते की चाह हो।

सरकार की ओर से तो यह कहा जाता है कि कोविड-19 की वजह से आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ गई है। सरकार के पास सैलरी देने को पैसे नहीं है। कर्मचारियों की छंटनी की बात भी आ रही है। विकास योजनाएं एक साल के लिए रोक दी गई हैं। दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला बड़े जोरों से दो नए जिले बनाने का ऐलान करते हैं। तीसरे का नाम बदलने का ऐलान करते हैं। घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने।

अरे, जनता आपसे यह जानना चाहती है कि क्या दो जिले अलग बनाने में सरकार का कोई खर्चा नहीं लगता। यह बात इसी समय दिमाग में क्यों आई, जब प्रदेश की जनता मूलभूत आवश्यकताओं के लिए तरस रही है। क्या यह केवल और केवल प्रदेश की जनता का ध्यान दूसरी ओर आकर्षित करने का प्रयास है या अपनी गिरती हुई लोकप्रियता को किसी प्रकार से संभालने का प्रयास?

प्रदेश की अवस्था डांवाडोल है। अधिकतर विभागों के कर्मचारी कोरोना लॉकडाउन के समय में भी प्रदर्शन और ज्ञापन दे रहे हैं। कर्मचारियों के पास रोजगार की समस्या खड़ी हो रही है। ऐसे में उपमुख्यमंत्री और नया शगूफा लेकर आ गए कि हमने पोर्टल बना दिया है, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा, कंपनियों को कर्मचारी मिलेंगे और सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। अरे भाई, जनता जानना चाहती है कि अगर ऐसी ही जादू की छड़ी आपके पास थी तो जबसे आप पद पर आसीन हुए हो, ये समस्याएं तो तभी भी मौजूद थीं, तब आपने कुछ क्यों नहीं किया। सरकारी पोर्टल जनता को कितना लाभ दे पा रहे हैं और निजी कार्य करने वाले कितना अच्छा परिणाम देते हैं और सरकार के कार्य कितना परिणाम देते हैं, आप सोचते हैं जनता को विदित नहीं है।

आज जनता यह जानती है कि प्रकृति की दी हुई यह बीमारी है, इसकी दवा मिल नहीं रही है। इसके बारे में डॉक्टर भी अंजान है। परंतु इसमें जनता यह तो चाहेगी कि जिस प्रकार इस महामारी के काल में जनता सरकार के साथ खड़ी है, उसी प्रकार सरकार की नियत भी तो हो कि वह जनता के साथ खड़ी हो।

इस समय में लोग कोरोना से तो परेशान हैं ही, उसके साथ-साथ अपनी रोजी-रोटी, भविष्य और दैनिक मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी चिंतित हैं। माना कि सरकार इस सबमें जनता की मदद नहीं कर सकती है परंतु साथ खड़ी तो नजर आ सकती है। जनता को यह तो लगना चाहिए कि सरकार हमारे साथ खड़ी है।

लगभग एक सप्ताह से रोजाना गुरुग्राम में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन गुरुग्राम भाजपा के नेताओं के मुंह से इस बारे में शब्द नहीं निकल रहे, उनके मुंह से शब्द निकल रहे हैं कि पिछले एक वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कितनी उपलब्धियां रहीं।

भाजपा के नेताओं ने यह ध्यान नहीं किया कि गुरुग्राम में कोरोना काल में किस-किस चीज की कमी है, जिसकी पूर्ति से जनता को लाभ हो सके लेकिन उन्होंने ध्यान दिया कि किस प्रकार भाजपा संगठन चुनाव में अपनी-अपनी लॉबिंग कर सकें। किस प्रकार किसे कौन-सा पद हासिल हो जाए।

इन सब बातों को देखकर आज विश्व पर्यावरण दिवस पर दिल से एक ही बात निकलती है कि हमारी राजनीति का प्रदूषण क्या कभी दूर होगा?

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