किसान-मजदूरों की मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन

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मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन; न्यूनतम वेतन, रोजगार, पेंशन और जनसुविधाओं के मुद्दे उठाए

मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन: श्रवण कुमार गुप्ता व बलवान सिंह

गुरुग्राम, 03 नवंबर। किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं की मांगों को लेकर मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया गया। ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम साझा जन-ज्ञापन उपायुक्त कार्यालय के अधीक्षक रजनीश गोयल को सौंपा गया।

प्रदर्शन का आयोजन 26 अक्टूबर को रोहतक में हुई राज्य स्तरीय किसान-मजदूर-छात्र-युवा-महिला महापंचायत के फैसलों के तहत किया गया। धरने को संबोधित करते हुए श्रमिक संगठन के जिला सचिव श्रवण कुमार गुप्ता और युवा संगठन के प्रांतीय संयोजक बलवान सिंह ने कहा कि प्रदेश के किसान, मजदूर, युवा, छात्र और महिलाएं विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों की अनदेखी कर रही है। दोनों नेताओं ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

फसलों की खरीद और मजदूरों के लिए 42 हजार रुपये वेतन की मांग

ज्ञापन में बाजरा और धान की पूरी उपज की सरकारी खरीद, खाद-बीज की समय पर उपलब्धता तथा लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की कानूनी गारंटी मांगी गई। इसके साथ ही खेतों में जलभराव का स्थायी समाधान करने और खराब हुई फसलों का समुचित मुआवजा देने की मांग रखी गई।

संगठनों ने चारों श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए उन्हें रद्द करने, आठ घंटे का कार्यदिवस सुनिश्चित करने और सभी मजदूरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 42 हजार रुपये निर्धारित करने की मांग की। आशा, आंगनवाड़ी और मध्याह्न भोजन कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर समान मासिक वेतन देने की मांग भी उठाई गई। सीवर, निर्माण स्थलों और आयुध कारखानों सहित सभी कार्यस्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

स्थायी रोजगार, सस्ती शिक्षा और दस हजार रुपये पेंशन का मुद्दा उठाया

ज्ञापन में हरियाणा कौशल रोजगार निगम की व्यवस्था और अग्निवीर भर्ती योजना वापस लेने तथा निगम के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की गई। रोजगार को संवैधानिक अधिकार बनाने और ग्रामीण गरीबों को पूरे वर्ष काम की गारंटी देने की मांग भी रखी गई। संगठनों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का विरोध करते हुए वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष और सस्ती शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई।

वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन बढ़ाकर दस हजार रुपये मासिक करने, परिवार पहचान पत्र योजना रद्द करने तथा संपत्ति पहचान संख्या से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। निजी बसों में बुजुर्गों को आधे किराये और विद्यार्थियों को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देने पर जोर दिया गया।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने, अपराधियों को शीघ्र दंड दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने तथा महिलाओं से रात्रि पाली में काम नहीं लेने की मांग भी उठाई गई।

अस्पताल निर्माण, सफाई और कूड़ा उठान की समस्याएं भी रखीं

स्थानीय मुद्दों पर संगठनों ने पुराने नागरिक अस्पताल के पुनर्निर्माण को शीघ्र पूरा करने, शीतला माता चिकित्सा महाविद्यालय में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने और सरकारी स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की मांग की। शहर की गलियों और सड़कों की नियमित सफाई तथा समय पर कूड़ा उठान सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कूड़ा उठान के नाम पर ठेकेदारों द्वारा कथित अवैध वसूली रोकने की मांग की।

ज्ञापन में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने और सूची से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग भी रखी गई। संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार से भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वार्ता से पीछे हटने को कहा गया।

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Author: Bharat Sarathi

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