अतिथि शिक्षकों की पक्की नौकरी की उम्मीदों पर चलाया धोखे का बुलडोजर : सुरजेवाला

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10,757 शिक्षकों के नियमितीकरण से इनकार का आरोप; नायब सरकार को बताया शिक्षा और रोजगार विरोधी

उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देकर पूछा—58 वर्ष तक सेवा तो पक्की नौकरी क्यों नहीं?

चंडीगढ़, 3 नवंबर 2026। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर प्रदेश के 10,757 अतिथि शिक्षकों को नियमित करने से इनकार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षकों की पक्की नौकरी की उम्मीदों पर ‘‘धोखे का बुलडोजर’’ चला दिया है। सुरजेवाला ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को घेरते हुए सरकार को शिक्षा और रोजगार विरोधी बताया।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के माध्यम से अतिथि शिक्षकों को नियमित नहीं करने का संदेश दिया गया है। उनके अनुसार, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने भी स्पष्ट किया है कि अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा और इस संबंध में पहले ही कारण सहित आदेश जारी किया जा चुका है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार अतिथि शिक्षकों की सेवा 58 वर्ष की आयु तक जारी रखने की बात करती है, तो उन्हें नियमित नौकरी का दर्जा और भविष्य की सुरक्षा क्यों नहीं देना चाहती? उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को नौकरी की असुरक्षा में रखना उनके साथ अन्याय है।

नियमितीकरण के दावों पर विचार करने के निर्देश का दिया हवाला

सुरजेवाला ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 25 मई 2026 को हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण संबंधी दावों पर 18 जून 2014 की नीति के तहत विचार किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षकों को राहत देने के बजाय नियमितीकरण से इनकार कर दिया और न्यायालय के निर्देशों की भी अनदेखी की है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकार की नीति और नीयत अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ‘‘कच्ची नौकरी के झांसे’’ को युवाओं के शोषण का माध्यम बना लिया है और अब अतिथि शिक्षक भी इसका शिकार हो रहे हैं।

खाली पदों और शिक्षकों की असुरक्षा पर उठाए सवाल

सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर शिक्षक स्तर तक हजारों पद खाली पड़े हैं। इसके बावजूद सरकार न तो शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है और न ही कार्यरत अतिथि शिक्षकों को नियमित नौकरी की सुरक्षा दे रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह रवैया बच्चों की शिक्षा और शिक्षकों के भविष्य, दोनों के प्रति उदासीनता दर्शाता है। सुरजेवाला ने कहा कि बच्चों के जीवन से शिक्षा की रोशनी और अतिथि शिक्षकों के जीवन से सुरक्षा का भरोसा छीनकर भाजपा सरकार ने अपना ‘‘चाल, चरित्र और चेहरा’’ उजागर कर दिया है।

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Author: Bharat Sarathi

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