हरियाणा लोक सेवा आयोग (राज्य सेवा समूह-ग) विनियम, 2002 में संशोधन को मंत्रिमंडल की स्वीकृति
नव-सृजित ग्रुप-सी पदों को शामिल करने; सेवा प्रावधानों को नवीनतम नियमों के अनुरूप बनाने के लिए संशोधन
चंडीगढ़, 3 नवंबर- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा लोक सेवा आयोग (राज्य सेवा समूह-ग) विनियम, 2002 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। इन संशोधनों का उद्देश्य आयोग में नवसृजित ग्रुप-सी पदों को शामिल करना तथा मौजूदा प्रावधानों को नवीनतम सरकारी नियमों एवं निर्देशों के अनुरूप बनाना है।
इन संशोधनों के माध्यम से हरियाणा लोक सेवा आयोग में ग्रुप-सी के विभिन्न पदों की स्वीकृत संख्या को अद्यतन किया जाएगा। आयोग में परीक्षाओं की बढ़ती संख्या तथा अन्य संबंधित कार्यों के कारण कार्यभार में हुई वृद्धि को देखते हुए यह संशोधन आवश्यक हो गया था।
संशोधित विनियमों के अनुसार, आयोग में ग्रुप-सी के कुल 85 स्वीकृत पद होंगे, जिनमें 15 नव-सृजित पद शामिल हैं। इनमें एक अनुभाग अधिकारी, तीन उप-अधीक्षक, एक निजी सहायक, 25 सहायक, दो सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर, दो जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, छह स्टेनो टाइपिस्ट, 13 चालक, 29 लिपिक, एक रेस्टोरर तथा दो गेस्टेटनर ऑपरेटर के पद शामिल हैं।
मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित संशोधनों में इन पदों पर नियुक्ति के लिए पात्रता शर्तों में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत तिब्बती शरणार्थियों तथा पाकिस्तान, बर्मा, श्रीलंका और कुछ पूर्वी अफ्रीकी देशों से भारत में प्रवास करने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों से संबंधित मौजूदा प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव है। अब पात्रता भारत के नागरिकों तथा नेपाल और भूटान के नागरिकों तक सीमित होगी। हालांकि, नेपाल और भूटान के नागरिकों की नियुक्ति इस शर्त पर होगी कि उन्हें सरकार द्वारा पात्रता प्रमाण-पत्र जारी किया गया हो।
इसके अतिरिक्त, विनियम 13 के अंतर्गत अनुशासनात्मक मामलों, अपील तथा अन्य सेवा संबंधी मामलों के प्रावधानों को हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के अनुरूप किया जाएगा। इस सम्बन्ध में वर्ष 1987 के पूर्ववर्ती नियमों के संदर्भ को प्रतिस्थापित किया जाएगा। संशोधनों में लागू नियमों के अनुसार सक्षम प्राधिकारियों का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण संशोधन के तहत विनियमों के परिशिष्ट-ख में मैट्रिक स्तर तक हिंदी विषय की अनिवार्यता में भी संशोधन किया जाएगा। अब इसके स्थान पर मैट्रिक स्तर पर हिंदी या संस्कृत में से किसी एक विषय अथवा उच्च शिक्षा स्तर पर हिंदी विषय पढ़ा होना मान्य होगा।
हरियाणा मंत्रिमंडल ने कॉलेज कैडर ग्रुप-सी सेवा नियमों में संशोधन को दी मंजूरी
जूनियर लेक्चर असिस्टेंट के पद पर सीधी भर्ती एवं पदोन्नति के लिए शैक्षणिक योग्यता में किया संशोधन
चण्डीगढ़, 3 नवंबर- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा शैक्षणिक कॉलेज कैडर (ग्रुप-सी) सेवा नियम, 1986 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। इसके तहत जूनियर लेक्चर असिस्टेंट के पद पर नियुक्ति के लिए शैक्षणिक योग्यता में संशोधन करने के साथ-साथ सेवा संबंधी अन्य प्रावधानों को भी अद्यतन किया गया है।
संशोधित नियम हरियाणा शैक्षणिक कॉलेज कैडर (ग्रुप-सी) सेवा (संशोधन) नियम, 2026 कहलाएंगे। ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जूनियर लेक्चरर असिस्टेंट के पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का विज्ञान संकाय में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं गणित (पीसीएम) अथवा भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान (पीसीबी) विषयों के साथ 10$2 उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज में लेबोरेटरी अटेंडेंट के रूप में पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। अभ्यर्थी के पास मैट्रिक स्तर पर हिंदी या संस्कृत विषय अथवा उच्च शिक्षा में हिंदी विषय का होना भी आवश्यक है।
पदोन्नति के माध्यम से नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता 10$2 या इसके समकक्ष होगी और पद पर नियमित नियुक्ति के बाद लेबोरेटरी अटेंडेंट के तौर पर पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य होगा।
संशोधित नियमों के तहत सीधी भर्ती के लिए आयु सीमा 18 से 42 वर्ष निर्धारित की गई है, जो हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग में आवेदन जमा करवाने की अंतिम तिथि के आधार पर निर्धारित की जाएगी। ऊपरी आयु सीमा में छूट हरियाणा सिविल सेवा (सामान्य) नियम, 2016 के अनुसार दी जाएगी।
नए नियमों के अनुसार, आयोग वंचित अनुसूचित जातियों, अन्य अनुसूचित जातियों, पिछड़ा वर्ग, भूतपूर्व सैनिकों तथा दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित रिक्तियों के लिए निर्धारित अनुभव वाले पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध न होने पर अनुभव की आवश्यकता में 50 प्रतिशत तक की छूट दे सकता है। इस प्रकार की छूट देने के कारणों को लिखित रूप में दर्ज करना होगा।
संशोधित नियमों में राष्ट्रीयता, आरक्षण तथा परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद पुष्टि से संबंधित प्रावधानों को भी अद्यतन किया गया है। भारतीय नागरिक और नेपाल या भूटान के नागरिक नियुक्ति के पात्र होंगे, लेकिन नेपाल या भूटान के नागरिकों के पास सरकार द्वारा जारी पात्रता प्रमाण-पत्र होना जरूरी है।
आरक्षण तथा अन्य रियायतें राज्य सरकार के आदेशों के अनुसार लागू रहेंगी। इन संशोधनों में सरकार को पदों की संख्या बढ़ाने या घटाने या अलग-अलग पदनाम और वेतनमान के साथ नए नियमित पद सृजित करने का अधिकार भी दिया गया है।
हरियाणा कैबिनेट ने टीडीआर पॉलिसी में संशोधनों को दी मंजूरी
टीडीआर प्रमाणपत्रों के घटते मूल्य से जुड़ी चिंताओं का होगा समाधान; बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि जुटाना होगा आसान
चंडीगढ़, 3 नवंबर-हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) प्रदान करने और उसके उपयोग से संबंधित 16 नवंबर, 2021 की नीति में संशोधनों को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य टीडीआर प्रमाण-पत्रों के मूल्यांकन, हस्तांतरण और उपयोग से जुड़े मुद्दों का समाधान करना तथा प्रदेशभर में बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन को सुगम बनाना है।
मौजूदा टीडीआर पाॅलिसी के तहत उन भू-स्वामियों को टीडीआर प्रमाण-पत्र दिए जाने का प्रावधान है, जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक अपनी भूमि सरकार को देते हैं। भू-स्वामी ऐसे प्रमाणपत्रों को उसी विकास योजना के भीतर डेवलपर्स या अन्य उपयोगकर्ताओं को बेचकर अपने विकास अधिकारों का मुद्रीकरण (मोनीटाइज) करके धनराशि प्राप्त कर सकते हैं।
संशोधित नीति के तहत, उस काल्पनिक भूमि (नोशनल लैंड) की गणना के फार्मूला को संशोधित किया जाएगा, जिसके लिए टीडीआर प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यह गणना आवेदन के कैलेंडर वर्ष की 1 जनवरी को लागू दर से जुड़े मौजूदा प्रावधान के बजाय, आवेदन जमा करने की तिथि को दी गई भूमि पर लागू भारित औसत कलेक्टर रेट पर आधारित होगी।
मंत्रिमंडल ने प्राप्ति स्थल (रिसीविंग साइट) की नोशनल भूमि की गणना के फार्मूले में भी बदलाव को मंजूरी दी है। संशोधित गणना में आवेदन जमा करने की तिथि पर प्राप्ति स्थल पर लागू भारित औसत कलेक्टर दर को ध्यान में रखा जाएगा, जिसके आधार पर टीडीआर प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया था।
इसके अलावा, टीडीआर प्रमाण-पत्र प्रदान करने के लिए संबंधित उपायुक्त द्वारा अधिसूचित कलेक्टर दर और आवेदन जमा करने की तिथि पर लागू कलेक्टर दर को मान्य माना जाएगा, चाहे उसे अंततः किसी भी तिथि को उपयोग में लाया जाए।
संशोधनों में यह भी प्रावधान है कि संशोधित फार्मूला उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रदान करने के लिए लंबित उन सभी आवेदनों पर लागू होगा, जहाँ टीडीआर प्रमाण-पत्र के उपयोग के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति सहित कोई भी अनुमति नहीं दी गई है।
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव में, नीति के तहत जारी किए गए टीडीआर प्रमाण-पत्र अब केवल उसी विकास योजना तक सीमित नहीं रहेंगे, जिसके लिए वे मूल रूप से जारी किए गए थे। अब ये राज्य की उसी विकास योजना में या किसी भी कम-क्षमता वाली विकास योजना में उपयोग के लिए वैध होंगे। इस प्रावधान का उद्देश्य टीडीआर प्रमाण-पत्रों के पारस्परिक उपयोग (क्रॉस-यूटिलाइजेशन) को सुगम बनाना और पूरे हरियाणा में परियोजना प्रस्तावकों को नीति का लाभ उठाने में सक्षम बनाना है।
इन संशोधनों का उद्देश्य समय के साथ टीडीआर प्रमाण-पत्रों के घटते मूल्य के संबंध में चिंताओं को दूर करना, उनकी उपयोगिता में सुधार करना और सेक्टर सड़कों, ग्रीन बेल्ट एवं अन्य नियोजित विकास कार्यों सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि एकत्रीकरण को आसान बनाना है।
हरियाणा में ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण अनिवार्य, धोखाधड़ी और अवैध तरीके से विदेश भेजने वालों पर कसेगा शिकंजा
मंत्रिमंडल ने हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन नियम, 2026 को दी मंजूरी; प्रत्येक सेवा श्रेणी के लिए अलग पंजीकरण जरूरी
नागरिक क्यूआर कोड स्कैन करके जांच सकेंगे संबंधित एजेंट के पंजीकरण की प्रामाणिकता
चंडीगढ़, 3 नवंबर-हरियाणा सरकार प्रदेश के युवाओं को विदेश में नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर ठगी करने वाले तथा अवैध तरीके से विदेश भेजने वाले लोगों से बचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन अधिनियम, 2025 के तहत हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन नियम, 2026 को मंजूरी प्रदान की गई।
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को धोखाधड़ी करने वाले ट्रैवल एजेंटों, अवैध विदेश भर्ती, मानव तस्करी और डंकी रूट जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों से बचाना तथा ट्रैवल एजेंटों के व्यवसाय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के तहत प्रदेश में ट्रैवल एजेंट का व्यवसाय करने वाले सभी नए और पहले से कार्यरत एजेंटों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। प्रत्येक नए कार्यालय या शाखा के लिए अलग पंजीकरण कराना होगा। इसी प्रकार, प्रत्येक सेवा श्रेणी के लिए भी अलग-अलग पंजीकरण आवश्यक होगा। इनमें पासपोर्ट सेवाएं, टूर एवं ट्रैवल एजेंसी सेवाएं, स्टडी वीजा कंसल्टेंसी और टिकटिंग सेवाएं शामिल हैं।
वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सेवा श्रेणी के पंजीकरण हेतु 5,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। पंजीकरण से पहले प्रत्येक आवेदक का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा, ताकि इस व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की जांच सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा 30 दिनों के भीतर पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। यह प्रमाणपत्र तीन वर्ष तक वैध रहेगा। आम नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता के लिए एजेंटों को क्यूआर कोड युक्त डिजिटल पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन करके संबंधित एजेंट के पंजीकरण की प्रामाणिकता और वैधता की जांच कर सकेंगे।
इसके अलावा, पंजीकृत ट्रैवल एजेंटों की जिला वार सूची और उनके पंजीकरण प्रमाणपत्र अंत्योदय सरल पोर्टल के साथ-साथ गृह विभाग एवं पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति एजेंट की वैधता की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सके।
नियमों के अनुसार, प्रत्येक पंजीकृत एजेंट को अपने कार्यालय के अंदर और बाहर पंजीकरण संख्या तथा प्रमाणपत्र जारी होने और समाप्त होने की तिथि प्रदर्शित करनी होगी। इसके अतिरिक्त, अपने विज्ञापनों, वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन पोर्टल पर भी पंजीकरण संख्या अंकित करना अनिवार्य होगा।
इन नियमों से ट्रैवल एजेंटों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और युवाओं को अवैध विदेश भर्ती तथा मानव तस्करी जैसी गतिविधियों से बचाने में मदद मिलेगी।
नई एकीकृत लाइसेंसिंग पॉलिसी-2022 के तहत संशोधित लाइसेंस नवीनीकरण प्रावधानों को मिली मंजूरी
एनआईएलपी कॉलोनियों पर लागू होंगे हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 के तहत लागू लाइसेंस नवीनीकरण प्रावधान
अंतिम अधिसूचना की तिथि से मौजूदा लाइसेंसों पर भी लागू होगा संशोधन
चंडीगढ़, 3 नवंबर-मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में नई एकीकृत लाइसेंसिंग नीति (एनआईएलपी)-2022 के खंड 9.2 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत परियोजनाओं के पूरा होने और लाइसेंस के नवीनीकरण से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
संशोधित प्रावधान के अनुसार, परियोजनाओं को पाँच वर्षों के भीतर पूरा करना होगा। यदि कोई परियोजना इस अवधि के भीतर पूरी नहीं होती है, तो उसके लाइसेंस का नवीनीकरण, लागू लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क के भुगतान पर हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 के नियम 13 के अनुसार किया जाएगा।
यह संशोधन एनआईएलपी कॉलोनियों के लाइसेंस नवीनीकरण को ग्रुप हाउसिंग कॉलोनियों के समान बनाता है। इसके तहत उस मौजूदा प्रावधान को प्रतिस्थापित किया गया है, जिसके तहत परियोजनाओं को सात वर्षों में पूरा करने का प्रावधान था। इसमें पाँच वर्ष की प्रारंभिक लाइसेंस वैधता और दो वर्ष का नवीनीकरण शामिल था, जिसके बाद नवीनीकरण के लिए लाइसेंस शुल्क के 100 प्रतिशत का भुगतान अपेक्षित था।
यह संशोधित प्रावधान अंतिम अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगा और सभी मौजूदा लाइसेंसों पर भी लागू होगा।
भू-मालिकों को मिलेगा विकसित क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा; चार वर्षों तक मिलेगी प्रतिवर्ष प्रति एकड़ 1 लाख रुपये की अंतरिम वित्तीय सहायता
बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चार वर्ष की समय-सीमा निर्धारित; समय पर कार्य पूरा न होने पर भू-मालिकों को वापस मिलेगी भूमि
चंडीगढ़, 3 नवंबर-मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में लैंड पूलिंग पाॅलिसी-2026 को मंजूरी प्रदान की गई। यह नीति मौजूदा लैंड पूलिंग पाॅलिसी-2022 का स्थान लेगी। नई नीति का उद्देश्य विकास परियोजनाओं में भू-मालिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
नई नीति के तहत, भू-मालिकों को स्वीकृत लेआउट प्लान के अनुसार परियोजना के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा, जबकि शेष 50 प्रतिशत हिस्सा विकास एजेंसी के पास रहेगा। भू-मालिकों के हिस्से का निर्धारण बाजार मूल्य से जोड़ने संबंधी पहले के प्रावधानों को हटा दिया गया है।
भू-मालिकों को मिलने वाले 50 प्रतिशत हिस्से में निर्धारित पात्रता के अनुसार वाणिज्यिक स्थल भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। शेष क्षेत्र परियोजना के उद्देश्य के अनुसार आवासीय, औद्योगिक अथवा संस्थागत भूखंडों के रूप में आवंटित किया जाएगा।
नीति के तहत भू-मालिकों को उनके द्वारा दी गई भूमि के अनुपात में, विक्रय विलेख (सेल डीड) के पंजीकरण की तारीख से चार वर्षों तक प्रतिवर्ष प्रति एकड़ 1 लाख रुपये की अंतरिम वित्तीय सहायता दी जाएगी। यदि सेल डीड के 15 दिनों के भीतर यह राशि हस्तांतरित नहीं की जाती है, तो भू-मालिक विलंब की अवधि के लिए 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज पाने के हकदार होंगे।
परियोजना को पूरा करने की समय-सीमा पांच वर्ष से घटाकर चार वर्ष कर दी गई है। विकास एजेंसी को परियोजना की अंतिम स्वीकृति की तारीख से चार वर्ष के भीतर सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास पूरा करना होगा। निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा न होने की स्थिति में भू-मालिकों को भूमि वापस कर दी जाएगी।
भू-मालिकों को आवंटित किए जाने वाले विकसित भूखंडों का न्यूनतम आकार भी निर्धारित किया गया है। इसके तहत आवासीय भूखंड 100 वर्ग मीटर, औद्योगिक भूखंड 250 वर्ग मीटर तथा संस्थागत भूखंड 500 वर्ग मीटर के होंगे। वास्तविक आवंटित क्षेत्र भूमि के योगदान के अनुपात में निर्धारित किया जाएगा। जिन भू-मालिकों का भूमि योगदान 2,000 वर्ग मीटर से अधिक होगा, उन्हें पात्रता के अनुसार कियोस्क अथवा बूथ के रूप में वाणिज्यिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे।
999 वर्ग मीटर से कम भूमि का योगदान करने वाले भू-मालिकों को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत अथवा भूखंड के आरक्षित मूल्य के अनुसार मुआवजा राशि दी जाएगी। इनमें से जो भी राशि अधिक होगी, वह भू-मालिक को प्रदान की जाएगी।
भूमि पात्रता प्रमाणपत्र (लैंड एंटाइटलमेंट सर्टिफिकेट) धारक अपने प्रमाणपत्रों को एक साथ जोड़कर बड़े आकार के विकसित भूखंडों के लिए संयुक्त रूप से आवेदन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, विकास एजेंसी द्वारा आवंटित भूखंडों को वापस खरीदने की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी गई है।
नीति में लैंड एग्रीगेटर का पारिश्रमिक संबंधित राजस्व संपदा में कृषि भूमि के कलेक्टर रेट का 0.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। यह राशि विकास एजेंसी द्वारा वहन की जाएगी तथा परियोजना की सेल डीड प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान किया जाएगा। नई नीति में ‘ई-भूमि’ के माध्यम से लैंड पूलिंग को शामिल नहीं किया गया है।








