निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कार्यकारी अभियंताओं को अपने क्षेत्रों की सड़कों का निरीक्षण करने के दिए निर्देश

गुरुग्राम, 3 नवंबर। शहर में वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम गुरुग्राम ने सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थलों को दुरुस्त एवं धूल मुक्त बनाने की दिशा में सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए धरातल पर प्रभावी सुधार सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि शहर की सड़कों पर मौजूद गड्ढों की मरम्मत हर हाल में 72 घंटे के भीतर कराई जाए, ताकि धूल उड़ने के स्रोतों को समाप्त किया जा सके।
निगमायुक्त मंगलवार को नगर निगम कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर की सड़कों, फुटपाथों और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति में सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर गड्ढे, क्षतिग्रस्त हिस्से, टूटी हुई सतह और अव्यवस्थित फुटपाथ धूल फैलने के प्रमुख स्रोत हैं। इसलिए सभी संबंधित अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर कमियों को तत्काल दूर करवाएं।
निगमायुक्त ने सभी कार्यकारी अभियंताओं को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र की सड़कों का स्वयं दौरा करें और यह सुनिश्चित करें कि उनके अधीन आने वाली सड़कें वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्धारित मानकों को पूरा करती हैं या नहीं। निरीक्षण के बाद संबंधित कार्यकारी अभियंता सड़कों की स्थिति के संबंध में प्रमाणित करेंगे। इसके पश्चात वरिष्ठ अधिकारी भी इन रिपोर्टों का सत्यापन करेंगे, ताकि निरीक्षण और अनुपालन की प्रक्रिया प्रभावी एवं जवाबदेह तरीके से पूरी हो सके। उन्होंने कहा कि सड़कों और फुटपाथों की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि कहीं भी अनावश्यक धूल जमा न हो और वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल न उड़े। इसके लिए क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, फुटपाथों को दुरुस्त करने और सड़क किनारे जमा मिट्टी एवं मलबे को हटाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
निगमायुक्त ने सफाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि शहर में कहीं भी निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) वेस्ट, बागवानी कचरा या अन्य प्रकार का कचरा खुले में पड़ा हुआ दिखाई नहीं देना चाहिए। सफाई शाखा प्रतिदिन नियमित सफाई सुनिश्चित करे और कचरे का समय पर उठान करवाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों, सड़क किनारों, फुटपाथों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि कचरे के ढेर और धूल के स्रोत समाप्त किए जा सकें।
शहर में धूल प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए निगमायुक्त ने डस्ट हॉटस्पॉट एक्शन प्लान तैयार करने और उसके अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर धूल जमा होने या उड़ने की समस्या अधिक है, उनकी पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। संबंधित अधिकारी केवल योजना बनाने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक स्थान पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और उसकी नियमित निगरानी भी करें।
निगमायुक्त ने शहर की सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) तथा नागरिकों की भागीदारी से डीप क्लीनिंग अभियान चलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास तभी व्यापक परिणाम दे सकते हैं, जब सरकारी एजेंसियों के साथ सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी हो। इसके अतिरिक्त, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बिल्डरों एवं एनजीओ को सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपने की संभावनाओं पर भी काम करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों की नियमित देखरेख, सफाई और रखरखाव को बेहतर बनाना है।
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों को दुरुस्त रखना, धूल के स्रोतों को समाप्त करना, कचरे का नियमित उठान और डस्ट हॉटस्पॉट पर प्रभावी कार्रवाई शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक है। नगर निगम का लक्ष्य है कि विभागीय जवाबदेही और जनभागीदारी के माध्यम से गुरुग्राम को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों को और गति दी जाए।








