संवैधानिक मूल्यों, संसदीय कार्यप्रणाली, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति जैसे विषयों पर होंगे व्यापक कार्यक्रम

चंडीगढ़, 1 नवंबर। हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन में जो महत्वपूर्ण विचार और विषय उभरकर सामने आए हैं, वे बीज मंत्र के समान हैं। इन विचारों को व्यापक विमर्श का हिस्सा बनाने और जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से संविधान पखवाड़े के तहत विस्तृत कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों एवं सिद्धांतों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया जाएगा।
विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि जनप्रतिनिधि सम्मेलन वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के सम्मान, उनके अनुभवों से सीखने और नई पीढ़ी की ऊर्जा एवं सोच को दिशा देने का एक सार्थक मंच साबित हुआ। वरिष्ठ पूर्व विधायक हमारी सामाजिक और लोकतांत्रिक धरोहर हैं। उनका अनुभव, ज्ञान और सक्रियता आज भी समाज के लिए उपयोगी है। संविधान पखवाड़े के तहत दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ऐसे आयोजन करने का उद्देश्य भी यही है कि वर्तमान और भावी पीढ़ी को वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के संघर्ष, अनुभव और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से प्रेरणा मिल सके। उनका व्यावहारिक अनुभव पुस्तकीय ज्ञान से कहीं अधिक व्यावहारिक सीख प्रदान करता है।

विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि संविधान पखवाड़े के आगामी कार्यक्रमों में संवैधानिक मूल्यों एवं सिद्धांतों, संसदीय कार्यप्रणाली, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा किए जाने की योजना है। सम्मेलन में अनुभवी जनप्रतिनिधियों ने अपने विचारों और अनुभवों के माध्यम से जिस प्रकार मार्गदर्शन किया है, उसे आगे भी संवाद और विमर्श के जरिए समाज तक पहुंचाया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा करते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं, विकास यात्रा, जनसेवा और संवैधानिक दायित्वों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
पूर्व मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा : उन्होंने विधान सभा की ओर से आयोजित इस अभिनव पहल की सराहना की। 26 अगस्त 2016 को विधान सभा में जैन मुनि तरुण सागर के प्रवचनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा अत्यंत समृद्ध है और हमें वरिष्ठ एवं अनुभवी लोगों के जीवन अनुभवों से सीखना चाहिए, जो प्रदेश की उन्नति का आधार भी है।
पूर्व मंत्री अशोक कुमार अरोड़ा : उन्होंने हरियाणा के गठन के शुरुआती दौर की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय बिजली, पानी, स्वास्थ्य, सड़क और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में अनेक कठिनाइयां थीं।
पूर्व मंत्री श्री ओमप्रकाश धनखड़ : जनप्रतिनिधियों का मुख्य उद्देश्य जन-सहभागिता को प्रोत्साहित करना होना चाहिए। जन-जन की सहभागिता से विकास संभव है। संवैधानिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने का यह प्रयास सराहनीय है। इन मूल्यों के प्रति लोगों में आस्था और विश्वास को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
पूर्व विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा : उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का लोगों के बीच रहना जरूरी है। इससे वे सामाजिक समस्याओं को बेहतर ढंग से समझकर उनके समाधान की दिशा में काम कर सकते हैं। ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देते हैं। सम्मेलन में मौजूद जनप्रतिनिधियों के अनुभवों से संसदीय कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला है।
पूर्व विधान सभा अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री कंवर पाल : उन्होंने कहा कि राजनीति की राहें भले ही अलग-अलग हों, लेकिन हरियाणा की प्रगति, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती और जनकल्याण सभी का साझा संकल्प है। संविधान के आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समरस और विकसित हरियाणा के निर्माण में सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
वरिष्ठतम महिला विधायक सावित्री जिंदल : उन्होंने विधान सभा अध्यक्ष की इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को स्वयं को जनता का सेवक समझना चाहिए, न कि मालिक।
पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह : उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का एक महत्वपूर्ण दायित्व लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करना है। मतदाता जितने अधिक जागरूक होंगे, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा।
पूर्व विधान सभा उपाध्यक्ष संतोष यादव : उन्होंने कहा कि सम्मेलन में वर्तमान और पूर्व विधायकों ने संविधान की गरिमा, लोकतांत्रिक मूल्यों, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और संवैधानिक दायित्वों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। भारतीय संविधान हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है।
पूर्व मंत्री किरण चौधरी : जन-प्रतिनिधियों को पूरी तैयारी के साथ सदन में आना चाहिए ताकि वह प्रभावी ढ़ंग से अपनी बात रख सके। ऐसा होने से ही समस्याओं का निराकरण संभव है। विषय में प्रदेशहित सर्वोपरि रहने चाहिए।
पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल : उन्होंने कहा कि कोई भी विधायक निर्वाचन के बाद सिर्फ अपने हलके का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्की वह प्रदेश के विधान मंडल का सदस्य होता है। उन्हें लोकहित व प्रदेश हित सर्वोपरि रखना चाहिए। इस नाते से वह प्रदेश की किसी भी समस्या को उठा सकता है।
मुख्य सचेतक रामकुमार कश्यप : उन्होंने कहा कि विधान सभा की समितियों को और सशक्त बनाना चाहिए। समिति के हर सदस्य की बात को अपनी बात प्रभावी ढ़ंग से रखनी चाहिए, जिससे कि विभागों से आने वाले अधिकारी इनकी बातों को गंभीरता से लें। ऐसा होने से समाज में जनप्रतिनिधियों का सम्मान बढ़ेगा और वे प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।
पूर्व विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता : उन्होंने पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर एकत्रित करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि संविधान हमारे लिए अमूल्य धरोहर है। इसके आदर्शों और मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना सभी का सामूहिक दायित्व है।
पूर्व मंत्री सुभाष कत्याल : उन्होंने कहा कि यह आयोजन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किया गया एक सराहनीय प्रयास है। इससे समाज में संवैधानिक मूल्यों के प्रति सकारात्मक संदेश गया है।
इनके अलावा पूर्व मंत्री गीता भुक्कल, पूर्व उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, पूर्व विधायक लहरी सिंह, पूर्व विधायक कैलाश चंद्र शर्मा, पूर्व मंत्री प्रो. छत्तर पाल, पूर्व विधायक डॉ. शिवशंकर भारद्वाज ने संवैधानिक मूल्यों को रेखांकित करते हुए अपने विचार रखे।








