भाजपा सरकार बनी खनन माफिया की संरक्षक : रणदीप सुरजेवाला

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वैध खरीद केवल 29,252 मीट्रिक टन, ई-रवाना से 1.71 लाख मीट्रिक टन की बिक्री दिखाने पर उठाए सवाल

स्वतंत्र जांच, ई-रवाना रिकॉर्ड के ऑडिट और प्लांट के भौतिक सत्यापन की मांग

चंडीगढ़, 14 सितंबर 2026। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा में कथित अवैध खनन को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। यमुनानगर के बेलगढ़ स्थित पंवार स्क्रीनिंग प्लांट से जुड़े कथित ई-रवाना फर्जीवाड़े का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन रोकने के लिए बनाया गया सरकारी पोर्टल ही फर्जी खरीद-बिक्री का माध्यम बन गया है।

सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा माइंस एंड जियोलॉजी इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमजीआईएस) का उद्देश्य खनिज की प्रत्येक आवाजाही का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखना है, लेकिन सामने आए आंकड़े इसकी कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

खरीद से करीब छह गुना बिक्री कैसे?

सुरजेवाला के अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड में वर्ष 2023 से अब तक पंवार स्क्रीनिंग प्लांट की वैध खरीद केवल 29,252 मीट्रिक टन दर्ज है, जबकि ई-रवाना पोर्टल के माध्यम से करीब 1,71,420 मीट्रिक टन खनिज सामग्री की बिक्री दिखाई गई है। इस हिसाब से वैध खरीद की तुलना में 1,42,168 मीट्रिक टन अधिक सामग्री की बिक्री दर्ज हुई।

उन्होंने सवाल किया कि जब प्लांट के पास केवल 29,252 मीट्रिक टन की वैध खरीद का रिकॉर्ड है तो 1.71 लाख मीट्रिक टन सामग्री की बिक्री के ई-रवाना कैसे जारी हो गए? उन्होंने इसे सरकारी ऑनलाइन व्यवस्था में कथित हेराफेरी का गंभीर मामला बताते हुए स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

खरीदार फर्मों की पहचान पर भी सवाल

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि शिकायत में अतिरिक्त सामग्री खरीदने वाली कई फर्मों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल अवैध खनन नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व और प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा बड़ा घोटाला होगा।

उन्होंने दावा किया कि पोर्टल पर अब भी 32,880.41 मीट्रिक टन अतिरिक्त संदिग्ध स्टॉक दिखाई दे रहा है। जब पोर्टल खनिज के एक-एक टन का हिसाब रखने के लिए बनाया गया था तो रिकॉर्ड में इतनी बड़ी विसंगति कैसे पैदा हुई?

“यह केवल खनन घोटाला नहीं, बल्कि राजनीति, सफेदपोश लोगों और तंत्र की कथित मिलीभगत का गंभीर मामला है।”

मंत्री से जुड़े दावों की भी हो जांच

कांग्रेस नेता ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों और शिकायतों में कुछ खरीदार प्लांटों के संबंध प्रदेश के एक बड़े मंत्री से जुड़े होने तथा उनके रिश्तेदार को कथित रूप से ‘साइलेंट पार्टनर’ बताए जाने के दावे भी सामने आए हैं। इन दावों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कोई तथ्य सामने आने पर सरकार को सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन सरकार जांच से भाग भी नहीं सकती।

मुख्यमंत्री और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार बताए कि ऑनलाइन पोर्टल, विभागीय अधिकारी और खनन व्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए हैं या कथित भ्रष्टाचार का रास्ता बनाने के लिए।

सुरजेवाला ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने, ई-रवाना रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट करवाने, संबंधित स्क्रीनिंग प्लांटों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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Author: Bharat Sarathi

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