बिना सर्वे आय तय करना अव्यावहारिक, गांवों में आपसी रंजिश बढ़ने की आशंका
रेवाड़ी, 12 सितंबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि हरियाणा सरकार ग्राम सभाओं में सत्यापन के नाम पर बीपीएल राशन कार्डों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने मांग की कि किसी भी परिवार का बीपीएल दर्जा तय करने से पहले निष्पक्ष सर्वे और आय की उचित जांच कराई जाए।
विद्रोही ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस समय 39.76 लाख परिवार गरीबी रेखा से नीचे हैं। उनका आरोप है कि अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद लगभग 14 लाख परिवारों को बीपीएल श्रेणी से हटाकर उनकी सुविधाएं पहले ही बंद की जा चुकी हैं। अब ग्राम सभाओं के माध्यम से सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करके और परिवारों के नाम सूची से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि बिना किसी जमीनी सर्वे और जांच के परिवार पहचान पत्र में दर्ज आय को ग्राम सभा में सही या गलत कैसे ठहराया जा सकता है? ऐसी व्यवस्था में वास्तविक गरीबों का बीपीएल सूची में बने रहना ग्राम सभा में उपस्थित लोगों की राय पर निर्भर हो जाएगा।
विद्रोही ने आशंका जताई कि इससे गांवों में आपसी भाईचारा प्रभावित होगा तथा एक-दूसरे के बीपीएल कार्ड कटवाने को लेकर रंजिश भी बढ़ सकती है। इसलिए पहले प्रत्येक परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति का सर्वे होना चाहिए और जांच के निष्कर्ष तथ्यों सहित ग्राम सभा के सामने रखे जाने चाहिए।
गरीबी के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
विद्रोही ने केंद्र और प्रदेश सरकार के गरीबी संबंधी दावों में विरोधाभास होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री देश में 25 करोड़ लोगों के गरीबी रेखा से बाहर आने का दावा करते हैं, जबकि दूसरी ओर हरियाणा में 39.76 लाख परिवार बीपीएल श्रेणी में दर्ज हैं।
उन्होंने दावा किया कि इन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, जबकि भाजपा शासन से पहले यह अनुपात 20 से 25 प्रतिशत था। विद्रोही ने कहा कि सरकार को प्रचार के बजाय वास्तविक गरीब परिवारों के अधिकारों और सुविधाओं की रक्षा करनी चाहिए।








