प्रधान सलाहकार श्री ढेसी ने की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंत्रणा
इंजेक्शन वेल, झील-तालाब, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अरावली में जल संग्रहण की संभावनाएं तलाशने पर जोर
गुरुग्राम, 11 सितंबर। मानसून के दौरान गुरुग्राम में होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब शहर के बाहर पानी निकालने के बजाय अधिक से अधिक बरसाती पानी को शहर और उसके आसपास ही रोककर संग्रहित करने की रणनीति पर काम किया जाएगा। हरियाणा शहरी विकास विभाग के प्रधान सलाहकार श्री डी.एस. ढेसी ने शुक्रवार को संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जलभराव से निपटने के उपायों पर चर्चा की और अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में जीएमडीए के सीईओ श्री पी.सी. मीणा, उपायुक्त श्री उत्तम सिंह, एचएसवीपी प्रशासक श्रीमती वैशाली सिंह सहित जीएमडीए, सिंचाई विभाग, गुरुग्राम एवं मानेसर नगर निगम, हरसैक, ट्रैफिक पुलिस तथा नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
श्री ढेसी ने जीएमडीए तथा गुरुग्राम और मानेसर नगर निगमों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां नए तालाब अथवा झील विकसित की जा सकती हैं। उनके अनुसार मानेसर के शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण इलाकों में जलभराव अधिक देखने को मिला है। इसलिए मानेसर निगम क्षेत्र में शामिल गांवों में कम से कम 15 ऐसे गांव चिन्हित किए जाएं, जहां बड़े जलाशय बनाकर बरसाती पानी को रोका जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि मानेसर निगम क्षेत्र के 30 गांवों में 85 जोहड़ अथवा तालाब हैं। इनमें से पानी के बहाव, जलग्रहण क्षेत्र और तालाब के आकार के आधार पर बड़े जलाशयों को चिन्हित कर उनकी क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं देखी जाएंगी। जीएमडीए और गुरुग्राम नगर निगम को भी मौजूदा जलाशयों की क्षमता बढ़ाने तथा सरकारी जमीन पर नए जलाशय विकसित करने के लिए स्थल चिन्हित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में इंजेक्शन वेल की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। श्री ढेसी ने गुरुग्राम नगर निगम अधिकारियों से आईआईटी गांधीनगर के साथ प्रस्तावित इंजेक्शन वेल की संख्या और योजना की जानकारी ली तथा रिपोर्ट तैयार करने की समयसीमा तय करने को कहा। अधिकारियों ने बताया कि आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञों ने 50 लीटर प्रति सेकंड क्षमता वाले इंजेक्शन वेल का डिजाइन तैयार किया है, जिससे बरसाती पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने में मदद मिलेगी। बैठक में जीएमडीए के सीईओ श्री पी सी मीणा ने बताया कि जीएमडीए भी आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के सहयोग से उच्च वैज्ञानिक तकनीक से 5 रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनवा रहा है । इनमें से इस बार एक स्ट्रक्चर तैयार हो पाया, जो सेक्टर 31 की ग्रीन बेल्ट में है और इसमें लगे फ्लो मीटर से पता चला है कि एक बारिश में ही इसमें लगभग तेरह लाख लीटर पानी ज़मीन में रिचार्ज हुआ है ।
श्री ढेसी ने अरावली क्षेत्र में पहाड़ों पर ही बरसाती पानी को रोकने की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि पानी को प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में ही संग्रहित किया जा सके तो शहर की ड्रेनेज प्रणाली पर दबाव काफी कम किया जा सकता है। इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों के साथ भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने जापानी कंपनी निपोनकोई के प्रतिनिधि से गुरुग्राम में जलभराव को लेकर किए जा रहे सर्वे एवं अध्ययन की प्रगति की जानकारी ली। कंपनी को अगले माह अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक निर्णय लेकर उपायों को समय रहते लागू किया जा सके।








