सुनील यादव, अभिषेक यादव और सुखबीर तंवर समेत कई कार्यकर्ताओं को बाहर नहीं निकलने देने का आरोप

गुरुग्राम, 14 सितंबर। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गुरुग्राम विश्वविद्यालय दौरे से पहले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित रूप से घरों में नजरबंद किए जाने पर जिला कांग्रेस कमेटी गुरुग्राम ग्रामीण के अध्यक्ष वर्धन यादव ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक कार्रवाई और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बताया।
कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले फर्रुखनगर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुनील यादव, युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अभिषेक यादव और कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुखबीर तंवर समेत कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने घरों से बाहर नहीं निकलने दिया। पार्टी के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री के सामने गुरुग्राम की समस्याएं और जनता के सवाल न उठा सकें।
सवालों से डर रही सरकार
वर्धन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना और जनता की आवाज उठाना है। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले विपक्षी पदाधिकारियों को घरों में रोकना सरकार की ताकत नहीं, बल्कि उसके डर को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के नागरिक जलभराव, टूटी सड़कों, यातायात जाम, बदहाल सीवर व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं की कमी से परेशान हैं। विद्यार्थियों से संबंधित कई समस्याएं भी लंबित हैं। सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि सवाल उठाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकना चाहिए।
शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार
वर्धन यादव ने कहा कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक असहमति अथवा संभावित विरोध के आधार पर किसी की आवाज दबाना उचित नहीं है। शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना और सरकार के सामने जनसमस्याएं रखना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि जिन कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका गया, पूरी पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है। प्रशासनिक दबाव अथवा नजरबंदी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हौसले कमजोर नहीं किए जा सकते।
जिला कांग्रेस कमेटी गुरुग्राम ग्रामीण ने प्रशासन से नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगाई गई कथित पाबंदियां तत्काल हटाने तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान करने की मांग की।
“लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है। जनता की आवाज को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है, लेकिन दबाया नहीं जा सकता।” — वर्धन यादव







