खरगे के मंच का ‘शुद्धिकरण’ दलित सम्मान पर हमला : विद्रोही

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कहा—हल्द्वानी प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज न होना उत्तराखंड सरकार की दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण

आरोप—भाजपा नेताओं के बयानों ने छुआछूत और जातिगत भेदभाव को दिया बढ़ावा

रेवाडी, 30 अगस्त। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित रूप से मंच का ‘शुद्धिकरण’ किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में उत्तराखंड की भाजपा सरकार और पार्टी नेताओं के रवैये से भाजपा का दलित विरोधी एवं मनुवादी चेहरा उजागर हुआ है।

विद्रोही ने कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को मल्लिकार्जुन खरगे ने जनसभा को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े लोगों ने वहां हवन और गंगाजल छिड़ककर कथित ‘शुद्धिकरण’ किया तथा इसका वीडियो भी सार्वजनिक किया। उन्होंने सवाल किया कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के अध्यक्ष द्वारा सार्वजनिक मंच से संबोधन करने के बाद उसके ‘शुद्धिकरण’ की आवश्यकता क्यों महसूस की गई?

उन्होंने आरोप लगाया कि खरगे दलित समाज से आते हैं और इसी कारण इस घटना ने देशभर के दलित समुदाय के सम्मान और स्वाभिमान को आहत किया है। लगभग 20 दिन बीतने के बाद भी कथित रूप से जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।

विद्रोही ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा नेताओं द्वारा घटना को जातिगत भेदभाव से अलग बताना स्वीकार्य नहीं है। यदि ‘शुद्धिकरण’ का संबंध खरगे की जाति से नहीं था तो राज्य सरकार को निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब देश के सबसे वरिष्ठ दलित नेताओं में शामिल मल्लिकार्जुन खरगे के साथ ऐसी घटना हो सकती है तो सामान्य दलित नागरिकों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। किसी भी सार्वजनिक स्थल को किसी व्यक्ति के आगमन या संबोधन के कारण ‘अशुद्ध’ बताना संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की भावना के विरुद्ध है।

विद्रोही ने सभी जागरूक नागरिकों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक न्याय के पक्षधर लोगों से इस घटना के विरुद्ध आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दलित समाज के सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए छुआछूत एवं जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाली हर मानसिकता का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विरोध करना समय की मांग है।

भाजपा ने संबंध से किया इनकार

इस मामले में भाजपा ने आयोजन से अपना संबंध होने से इनकार किया है। केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्यसभा में घटना की निंदा करते हुए जांच कराने की बात कही थी। आयोजक संस्था ने दावा किया कि हवन का संबंध खरगे की जाति से नहीं, बल्कि उनके कथित सनातन विरोधी बयानों से था। कांग्रेस ने इस तर्क को खारिज करते हुए दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

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Author: Bharat Sarathi

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