कहा–बदायूं में दलित युवक की हिरासत में मौत और हल्द्वानी में खरगे के मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटनाएं चिंताजनक
दलितों के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं, दोषियों पर कानून के तहत हो सख्त कार्रवाई
चंडीगढ़ 30 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में दलित समाज के सम्मान, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बदायूं में 28 वर्षीय दलित युवक राजेश की पुलिस हिरासत में मौत और उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि बदायूं मामले में परिवार द्वारा पुलिस पर हिरासत में बेरहमी से पिटाई के आरोप लगाए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति पुलिस हिरासत में जीवित जाता है और वापस जीवित नहीं लौटता तो निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से दलितों के साथ हिंसा, भेदभाव, अपमान और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आना सामाजिक न्याय की अवधारणा के लिए गंभीर चुनौती है। कहीं सामाजिक भेदभाव तो कहीं अधिकारों और सम्मान को लेकर संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारों का ऐसे संवेदनशील मामलों में अपेक्षित कठोरता नहीं दिखाना और जवाबदेही तय करने से बचना चिंताजनक है। संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देता है, इसलिए जाति के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कुमारी सैलजा ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना ने छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता पर फिर गंभीर बहस खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा कि जब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इतने वरिष्ठ दलित नेता के प्रति ऐसी मानसिकता प्रदर्शित की जा सकती है तो गांव-कस्बों में रहने वाले गरीब दलित परिवारों और बच्चों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं उस समाज से आती हैं जिसने सदियों तक छुआछूत, भेदभाव और अपमान का सामना किया है, इसलिए ऐसी घटनाओं की पीड़ा को केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।
हल्द्वानी की घटना की निष्पक्ष जांच कर कथित ‘शुद्धिकरण’ में शामिल लोगों की भूमिका तय की जाए
कुमारी सैलजा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस गंभीर मुद्दे को देश के करोड़ों दलितों के सम्मान और उनके साथ होने वाले भेदभाव से जोड़ते हुए मजबूती से उठाया है। कांग्रेस की मांग है कि हल्द्वानी की घटना की निष्पक्ष जांच कर कथित ‘शुद्धिकरण’ में शामिल लोगों की भूमिका तय की जाए और यदि जांच में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम अथवा अन्य लागू कानूनों के उल्लंघन का मामला बनता है तो उनके तहत कार्रवाई की जाए। इसी प्रकार बदायूं में पुलिस हिरासत में हुई मौत की भी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा न जाए।
दलित समाज के सम्मान पर चोट पहुंचाने वाली घटनाओं पर सरकारें चुप क्यों
कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान का नाम लेकर राजनीति करती है, लेकिन उसके शासन में दलितों के सम्मान और सुरक्षा पर लगातार उठ रहे सवाल उसके वास्तविक चेहरे को उजागर कर रहे हैं। कांग्रेस की लड़ाई किसी जाति या व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि जातिगत भेदभाव और मनुवादी मानसिकता के विरुद्ध है। यह संविधान की समानता और सामाजिक न्याय की भावना की रक्षा की लड़ाई है। सांसद ने कहा कि दलित समाज के सम्मान पर चोट पहुंचाने वाली घटनाओं में सरकारें चुप नहीं रह सकतीं। दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा कांग्रेस लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से दलितों के सम्मान और अधिकारों की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।








