‘मेघवाल’ शब्द की संस्तुति के विरोध में चमार समाज लामबंद, 7 सितंबर को फरुखनगर में रोष प्रदर्शन
अंबेडकर पार्क में आयोजित पंचायत में पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का लिया संकल्प

फरुखनगर, 30 अगस्त। चमार समाज की जातीय पहचान और सामाजिक अस्मिता के साथ कथित छेड़छाड़ के विरोध में रविवार को फरुखनगर के अंबेडकर पार्क में चमार पंचायत आयोजित की गई। पंचायत में बड़ी संख्या में पहुंचे समाज के लोगों ने अपनी पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुखबीर जे. तंवर के संयोजन में आयोजित पंचायत की अध्यक्षता चौधरी हरीराम ने की। पंचायत में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा चमार जाति के लिए ‘मेघवाल’ शब्द के प्रयोग की कथित संस्तुति पर कड़ा विरोध जताया गया।
पहचान कोई राजनीतिक प्रयोगशाला का विषय नहीं : तंवर
पंचायत को संबोधित करते हुए सुखबीर जे. तंवर ने कहा कि चमार समाज की पहचान कोई राजनीतिक प्रयोगशाला का विषय नहीं है। समाज की जातीय पहचान, सामाजिक अस्मिता और सम्मान के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री इस संस्तुति को अविलंब वापस लें और समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए क्षमा मांगें। तंवर ने स्पष्ट किया कि समाज का संघर्ष किसी व्यक्ति अथवा दूसरे समाज के विरुद्ध नहीं, बल्कि सदियों पुरानी पहचान, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
उन्होंने कहा, “चमार समाज किसी भी वर्ग या समुदाय के बीच वैमनस्य का प्रबल विरोधी है, लेकिन अपनी जातीय पहचान और अस्मिता के प्रश्न पर किसी भी कीमत पर चुप नहीं बैठेगा।”
‘विखंडनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने का आरोप’
तंवर ने आरोप लगाया कि भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के पिछले 12 वर्षों के शासनकाल में समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला है। व्यापक राष्ट्रहित में समाज को ऐसी अवधारणाओं से बचाते हुए संविधान के समानता, सामाजिक न्याय और भाईचारे के मूल्यों को सुदृढ़ करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में जातिगत जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां राजनीतिक धारणाओं अथवा भावनाओं के बजाय प्रामाणिक सामाजिक और जातीय आंकड़ों के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए। जातिगत जनगणना समाज को बांटने का माध्यम नहीं, बल्कि वंचित और पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति सामने लाकर उन्हें न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व दिलाने का आधार बननी चाहिए।
वक्ताओं ने संस्तुति वापस लेने की मांग की
पूर्व पार्षद जसवंत सिंह, राजेंद्र ताजनगर, मास्टर महाबीर रंगा और दिल्ली पुलिस के पूर्व अधिकारी ब्रह्म प्रकाश सहित अन्य वक्ताओं ने भी मुख्यमंत्री से ‘मेघवाल’ शब्द के प्रयोग संबंधी संस्तुति तत्काल वापस लेने और समाज से क्षमा मांगने की मांग की।
फरुखनगर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुनील यादव ने मुख्यमंत्री की कथित संस्तुति को विखंडनकारी और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
7 सितंबर को राज्यपाल के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 7 सितंबर, सोमवार को समाज के लोग अंबेडकर पार्क, फरुखनगर में व्यापक स्तर पर एकत्रित होकर शांतिपूर्ण रोष प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद तहसीलदार फरुखनगर के माध्यम से हरियाणा के राज्यपाल को ज्ञापन भेजा जाएगा।
पंचायत में ऋषि चांदनगर, हीरालाल खेड़ा, विशंबर दयाल थानेदार, सूबे सिंह जटौला, धनपत सिंह, महाबीर खेड़ा, मुकेश चंद, हुकम चंद, सरपंच नरेश कुमार, सरपंच महेश, नंबरदार भगवती चरण, पवन कुमार, मास्टर राजेश कुमार, जय नारायण, विक्रम सिंह, होशियार सिंह, रणबीर, संजय सरोहा, राकेश कुमार, मनीष कुमार, कृष्ण कुमार, रविंद्र, नत्थू राम, जय भगवान, रामनिवास, श्रीभगवान, प्रकाश वीर, प्रदीप कुमार, केवल राम, ताराचंद, सुभाष चंद्र, महावीर, प्रकाश चंद, जगमाल सिंह, त्रिलोक चंद, धर्मवीर, मदनपाल और लाल सिंह चौहान सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।








