संयुक्त मोर्चा ने सरकार पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप, बड़े आंदोलन की चेतावनी

गुरुग्राम, 31 अगस्त। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को गुरुग्राम सर्कल की सभी सब-डिवीजनों में बिजली वितरण के लिए पैरेलल लाइसेंस देने की नीति का जोरदार विरोध किया गया। कर्मचारियों और इंजीनियरों ने नीति की प्रतियां जलाकर प्रदर्शन किया तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग उठाई।

इंजीनियर सुरेश रुहिल ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार संयुक्त मोर्चा के साथ किए गए वादे से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त को प्रदेश के बिजली मंत्री के साथ हुई बैठक में गुरुग्राम और नूंह सर्कल में पैरेलल वितरण लाइसेंस नहीं देने पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद सरकार अब इस दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण न तो कर्मचारियों और अधिकारियों के हित में है और न ही आम उपभोक्ताओं के। निजी कंपनियों के प्रवेश से बिजली महंगी होने के साथ कर्मचारियों की सेवा-सुरक्षा और उपभोक्ताओं के अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने गुरुग्राम और नूंह में पैरेलल वितरण लाइसेंस देने, एग्री-डिस्कॉम बनाने तथा स्मार्ट मीटर परियोजना को निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया तो प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
बिजली कर्मचारी नेताओं इंजीनियर मनमोहन जीत सिंह, सुशील शर्मा, सरोज, राजेश ठाकरान, मोहम्मद उस्मान खान, रविंदर यादव, सोमदत्त, मुकेश भ्याना, दलवीर मोर, अमरजीत जाखड़, सच्चिदानंद, पवन गोयल, राजकुमार शर्मा और राकेश ने एक स्वर में कहा कि किसी भी कीमत पर बिजली क्षेत्र का निजीकरण नहीं होने दिया जाएगा।









