62 प्रतिशत ब्लॉकों का भूजल स्वीकार्य सीमा से बाहर, पांच जिलों को 13 साल में नहीं मिला नहरी पानी
दूषित पेयजल की 41,275 शिकायतें सरकार की नाकामी का प्रमाण; कांग्रेस ने मांगा श्वेत पत्र
चंडीगढ़, 29 अगस्त। कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने हरियाणा में लगातार बिगड़ती पेयजल व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विधानसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-16 के जवाब में सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेज ही प्रदेश में पेयजल संकट की भयावह तस्वीर सामने रख रहे हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश के अनेक गांवों में माताएं आज भी खारा और धुंधला पानी अपने बच्चों को पिलाने के लिए मजबूर हैं। पानी उबालने से उसमें घुले टीडीएस, फ्लोराइड, नाइट्रेट और अन्य हानिकारक तत्व समाप्त नहीं होते। साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन हरियाणा की जनता इसके लिए लगातार संघर्ष कर रही है।
उन्होंने कहा कि दूषित एवं खारा पानी अब केवल पेयजल का विषय नहीं रहा। यह लोगों के स्वास्थ्य, पारिवारिक आय, खेती, पशुपालन और बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुका है। पलवल, नूंह, महेंद्रगढ़, जींद, सोनीपत और चरखी दादरी सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों के लोग वर्षों से यह समस्या झेल रहे हैं।
88 ब्लॉकों में टीडीएस स्वीकार्य सीमा से अधिक
सुरजेवाला ने बताया कि वर्ष 2025 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार हरियाणा के 142 में से 88 ब्लॉकों, यानी लगभग 62 प्रतिशत ब्लॉकों में भूजल का औसत टीडीएस 500 मिलीग्राम प्रति लीटर की स्वीकार्य सीमा से अधिक है। इनमें 35 ब्लॉक ऐसे हैं, जहां टीडीएस 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर अथवा उससे ज्यादा दर्ज किया गया।
उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा सदन में रखे गए सात वर्षों के रिकॉर्ड में यह सबसे चिंताजनक स्थिति है।
तीन साल में 93 ब्लॉकों का पानी और खराब
वर्ष 2022 की तुलना में 2025 तक प्रदेश के 142 में से 93 ब्लॉकों, यानी 65.5 प्रतिशत क्षेत्रों में भूजल की गुणवत्ता खराब हुई है। इस दौरान 1,500 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक टीडीएस वाले ब्लॉकों की संख्या दो से बढ़कर नौ हो गई, जबकि राज्य का औसत टीडीएस 658 से बढ़कर 737 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गया।
सुरजेवाला ने कहा, “भाजपा सरकार के कार्यकाल में पानी सुधरने के बजाय लगातार खराब हो रहा है।”
पलवल और नूंह में हालात सबसे गंभीर
उन्होंने बताया कि पलवल में तीन वर्षों के दौरान औसत टीडीएस 74 प्रतिशत बढ़कर 940 से 1,636 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। जिले के सभी छह ब्लॉक इससे प्रभावित हैं।
नूंह के इंडरी ब्लॉक में टीडीएस लगभग दोगुना होकर 1,002 से 1,974 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गया। यह 2,000 मिलीग्राम प्रति लीटर की उस अधिकतम सीमा के बेहद करीब है, जिसे भारतीय मानकों में वैकल्पिक जलस्रोत उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में ही स्वीकार किया जाता है।
सरकार के वर्ष 2025 के परीक्षण रिकॉर्ड में कुछ पेयजल स्रोतों का टीडीएस 9,553, 8,791, 6,979 और 6,140 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज होने का दावा करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि कहीं-कहीं पानी स्वीकार्य सीमा से 19 गुना तक अधिक खारा है।
पांच जिले आज भी पूरी तरह भूजल पर निर्भर
सुरजेवाला ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार फरीदाबाद, गुरुग्राम, पलवल, पंचकूला और यमुनानगर आज भी शत-प्रतिशत भूजल पर निर्भर हैं। वर्ष 2014 में भी इन जिलों में नहरी जलापूर्ति की स्थिति शून्य थी और 2026 में भी वही स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि यदि 13 वर्षों में पांच जिलों तक नहरी पेयजल नहीं पहुंच पाया, तो यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल है।
करनाल जिले में भी नहरी पानी की कवरेज वर्ष 2014 से लगभग 1.90 प्रतिशत पर अटकी हुई है और करीब 98.10 प्रतिशत निर्भरता भूजल पर बनी हुई है। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही नहरी जलापूर्ति नहीं सुधार सकी तो पलवल, नूंह और कैथल के लोगों को किस आधार पर आश्वासन दिया जा रहा है।
दूषित पानी की शिकायतों में 7.2 गुना वृद्धि
सरकारी आंकड़ों का उल्लेख करते हुए सुरजेवाला ने बताया कि दूषित पेयजल से संबंधित शिकायतों की संख्या वर्ष 2019 में 1,356 थी, जो 2025 में बढ़कर 9,769 हो गई। इस प्रकार छह वर्षों में शिकायतों में करीब 7.2 गुना वृद्धि हुई।
वर्ष 2025 में आंकड़े देने वाले 21 जिलों में से 15 में यह शिकायतों का अब तक का सबसे खराब वर्ष रहा। वर्ष 2026 में भी अब तक 6,676 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “41,275 शिकायतें महज आंकड़ा नहीं हैं। प्रत्येक शिकायत के पीछे एक ऐसा परिवार है, जिसकी रोजमर्रा की जिंदगी दूषित पानी ने मुश्किल बना दी है।”
गरीब परिवारों पर खारे पानी का ‘छिपा हुआ टैक्स’
सुरजेवाला ने कहा कि दूषित और खारा पानी गरीब परिवारों पर “छिपा हुआ टैक्स” बन चुका है। जिन घरों में नल का पानी पीने योग्य नहीं है, उन्हें मजबूरी में पानी के कैन खरीदने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस पानी को उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, उसके लिए मजदूर और गरीब परिवार अपनी जेब से पैसा खर्च कर रहे हैं। खारा पानी पाइपों और मोटरों को नुकसान पहुंचाने के साथ खेती एवं पशुपालन को भी प्रभावित कर रहा है।
हानिकारक तत्वों की जानकारी सार्वजनिक करे सरकार
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार ने टीडीएस के आंकड़े तो सदन में रखे, लेकिन गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों के पानी में फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक और भारी धातुओं की स्रोतवार जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
उन्होंने कहा, “सरकार ने पानी में नमक तो नापा, लेकिन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक तत्वों की मात्रा बताना जरूरी नहीं समझा।”
सुरजेवाला के अनुसार विधानसभा प्रश्न में वर्ष 2019 से सीवरेज और बरसाती पानी के कारण पेयजल दूषित होने की घटनाओं का विवरण मांगा गया था। विभाग ने वास्तविक घटनाओं का रिकॉर्ड देने के बजाय पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की संख्या प्रस्तुत कर दी।
उन्होंने कहा कि शिकायतों और जल प्रदूषण की वास्तविक घटनाओं की संख्या एक नहीं हो सकती, क्योंकि अनेक गरीब एवं ग्रामीण परिवार सरकारी पोर्टल पर शिकायत दर्ज ही नहीं करा पाते। इसलिए 41,275 शिकायतें संकट का केवल वह हिस्सा हैं, जो सरकारी रिकॉर्ड तक पहुंच पाया है।
कांग्रेस ने सरकार के सामने रखीं छह मांगें
आदित्य सुरजेवाला ने मांग की कि सरकार—
- वर्ष 2014 से अब तक की सभी नहर आधारित पेयजल योजनाओं पर श्वेत पत्र जारी करे तथा जिलेवार स्वीकृत राशि, खर्च और वास्तविक प्रगति बताए।
- दूषित पेयजल की शिकायतों के अतिरिक्त जल प्रदूषण की वास्तविक घटनाओं का अलग राज्यव्यापी रजिस्टर बनाकर सार्वजनिक करे।
- 1,000 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक टीडीएस वाले सभी स्रोतों में फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक और भारी धातुओं की तत्काल जांच कराए।
- ब्लॉक के औसत आंकड़ों के बजाय प्रत्येक स्रोत की जल गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
- पलवल, नूंह और फरीदाबाद जैसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों के लिए समयबद्ध नहरी पेयजल योजना घोषित करे।
- नहरी पानी की शून्य कवरेज वाले पांच जिलों में जवाबदेही तय करके निश्चित समयसीमा में कार्ययोजना लागू करे।
सुरजेवाला ने कहा, “भाजपा सरकार के अपने आंकड़े उसकी नाकामी का प्रमाण हैं। 13 साल में पांच जिलों को नहरी पानी की एक बूंद नहीं मिली, 62 प्रतिशत ब्लॉकों का भूजल स्वीकार्य सीमा से ऊपर है और दूषित पेयजल की 41 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। हरियाणा की जनता को आंकड़े नहीं, साफ और सुरक्षित पानी चाहिए। कांग्रेस इस अधिकार के लिए सड़क से विधानसभा तक आवाज उठाती रहेगी।”









