रक्षाबंधन पर मुहूर्त के नाम पर भ्रम न फैलाएं : आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा

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भद्रा नहीं होने के कारण पूरे दिन मनाया जा सकता है रक्षाबंधन का पर्व

आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा ‘महेश’

पानीपत। आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा ‘महेश’ ने कहा है कि सोशल मीडिया पर रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म के शास्त्रीय नियमों को समझे बिना शुभ मुहूर्त के अलग-अलग समय बताए जा रहे हैं, जिससे सनातन धर्मावलंबियों में अनावश्यक भ्रम पैदा हो रहा है।

उन्होंने बताया कि आज प्रातः 9 बजकर 9 मिनट पर पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होने के साथ भद्रा भी आरंभ होगी, जो रात्रि 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। श्रावण पूर्णिमा पर भद्रा का होना प्राकृतिक पंचांग व्यवस्था का हिस्सा है। अगले दिन भद्रा नहीं रहने के बावजूद कुछ लोग राहुकाल का उल्लेख करके रक्षाबंधन के लिए सीमित समय को ही शुभ बता रहे हैं।

आचार्य शर्मा के अनुसार, भद्रा का विचार मुख्य रूप से श्रावणी उपाकर्म के संदर्भ में किया जाता है। रक्षाबंधन के लिए राहुकाल अथवा कालसर्प दोष का आधार बनाकर लोगों को भयभीत करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कल भद्रा नहीं है, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व पूरे दिन किसी भी समय श्रद्धा और प्रसन्नता के साथ मनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु विशेष शुभ योग में ही पर्व मनाना चाहते हैं, वे प्रातः 7 बजकर 28 मिनट के बाद प्रारंभ होने वाले सुकर्मा योग में रक्षाबंधन कर सकते हैं।

आचार्य डॉ. महेन्द्र शर्मा ने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अलग-अलग दावों से भ्रमित न हों और रक्षाबंधन का पावन पर्व पारिवारिक परंपरा, सुविधा और श्रद्धा के अनुसार मनाएं।

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Author: Bharat Sarathi

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