जनता पर लगातार बढ़ रहा बोझ, सरकार राहत देने के बजाय मुश्किलें बढ़ा रही : कुमारी सैलजा

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कहा—शहरों में कूड़े के ढेर, कर्मचारी आंदोलित, आयुष्मान सेवाओं पर संकट; अब पानी की दरों और राजस्व सेवाओं की फीस बढ़ाने की तैयारी से आम आदमी परेशान

सरकार टकराव का रास्ता छोड़ संवाद से कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करे और जनहित से जुड़ी दरों में बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करे

सिरसा, 28 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार की नीतियों और विभिन्न विभागों में बने गतिरोध का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। प्रदेश के अनेक शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित है, कर्मचारी आंदोलनरत हैं, पटवारी-कानूनगो की हड़ताल से राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित हो रहा है और अब निजी चिकित्सकों की ओर से एक सितंबर से आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार बंद करने की चेतावनी ने मरीजों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में सरकार को टकराव के बजाय संवाद और समाधान की नीति अपनानी चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के कारण कई शहरों में जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं। इसका असर केवल शहरों की सुंदरता पर नहीं, बल्कि स्वच्छता और जनस्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। आंदोलनरत कर्मचारियों के साथ पुलिस के माध्यम से स्थिति संभालने के बजाय सरकार को उनकी जायज मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए। इसी प्रकार पटवारी और कानूनगो के आंदोलन के कारण आम नागरिकों को जमीन, राजस्व और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद का खामियाजा जनता को नहीं भुगतना चाहिए।

सांसद ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा मामला और भी गंभीर है। निजी अस्पतालों और चिकित्सकों की ओर से आयुष्मान योजना के तहत उपचार को लेकर भुगतान सहित विभिन्न मुद्दे उठाए जा रहे हैं और एक सितंबर से सेवाएं रोकने की चेतावनी सामने आई है। यदि ऐसा होता है तो सबसे अधिक परेशानी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को होगी, जो उपचार के लिए आयुष्मान योजना पर निर्भर हैं। सरकार को चिकित्सकों और अस्पताल संचालकों के साथ तत्काल बातचीत कर ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे किसी मरीज का उपचार प्रभावित न हो।

कुमारी सैलजा ने कहा कि महंगाई से पहले ही परेशान जनता पर आवश्यक नागरिक सेवाओं का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से पेयजल की नई दरों में कई श्रेणियों में भारी वृद्धि की गई है। प्रकाशित विवरण के अनुसार बिना मीटर वाले आवासीय कनेक्शनों के लिए प्लॉट के आकार के आधार पर मासिक शुल्क तय किया गया है, जबकि मीटर वाले कनेक्शनों में पानी की खपत के अनुसार दरें निर्धारित की गई हैं। कुछ श्रेणियों में पहले की तुलना में कई गुना वृद्धि आम परिवार के घरेलू बजट पर सीधा असर डालेगी।

कुमारी सैलजा ने कहा कि दूसरी ओर राजस्व विभाग में जमीन-जायदाद, अदालती मामलों और निशानदेही से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित नकल की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव की खबरें भी चिंताजनक हैं। जिस नकल फॉर्म की फीस एक रुपये है, उसे 100 रुपये करने और तत्काल नकल के लिए 5 हजार रुपये तक फीस प्रस्तावित किए जाने की बात सामने आई है। राजस्व विभाग ने इस संबंध में उपायुक्तों से सुझाव मांगे हैं। सरकार को अंतिम निर्णय लेने से पहले किसानों, अधिवक्ताओं, प्रॉपर्टी से जुड़े लोगों और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।

शुल्कों का युक्तिसंगत होना जरूरी

कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता आम आदमी को राहत देना होनी चाहिए। खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों से परिवार पहले ही परेशान हैं। ऐसे में पानी जैसी बुनियादी सुविधा और सरकारी दस्तावेज हासिल करने की फीस में अत्यधिक वृद्धि उचित नहीं कही जा सकती। शुल्कों का युक्तिसंगत होना जरूरी है, लेकिन सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए नागरिकों की अनिवार्य जरूरतों को महंगा करना समाधान नहीं है।

जनता सरकार से चाहती है राहत और सुचारू व्यवस्था

सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार को कर्मचारियों के आंदोलनों का बातचीत से समाधान करने, आयुष्मान योजना के तहत निर्बाध उपचार सुनिश्चित करने, सफाई व्यवस्था सामान्य करने तथा पानी और राजस्व सेवाओं की प्रस्तावित बढ़ी दरों की समीक्षा करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। जनता सरकार से राहत और सुचारू व्यवस्था चाहती है, नई परेशानियां और अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं।

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Author: Bharat Sarathi

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