विधानसभा गेट पर धक्का-मुक्की के आरोप से सदन तक मचा बवाल, कार्यवाही दो बार स्थगित; कांग्रेस का वॉकआउट
कानून-व्यवस्था पर सरकार घिरी, मुख्यमंत्री ने माना—प्रदेश में फिरौती के मामलों में 17 प्रतिशत की वृद्धि

चंडीगढ़, 27 अगस्त। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन गुरुवार को भारी हंगामे, सत्ता पक्ष-विपक्ष की तीखी नोकझोंक, कार्यवाही के बार-बार बाधित होने और कांग्रेस विधायकों के निलंबन के नाम रहा। विधानसभा पहुंचने से पहले कांग्रेस विधायकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच हुआ विवाद सदन के भीतर भी गूंजता रहा। मामला इतना बढ़ा कि विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने कांग्रेस के आठ विधायकों को दिनभर की कार्यवाही के लिए निलंबित कर दिया। बाद में कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
काले कपड़ों में विधानसभा पहुंचे कांग्रेस विधायक
मानसून सत्र की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से हुई। उस समय कांग्रेस विधायक सदन के बाहर थे। बाद में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कांग्रेस विधायक काले कपड़ों में सदन में पहुंचे।
कांग्रेस विधायक विधानसभा पहुंचने से पहले विरोध मार्च कर रहे थे और विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कांग्रेस ने राम मंदिर चंदा प्रकरण, युवाओं और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा शोक प्रस्ताव पढ़े जाने तक सदन की कार्यवाही अपेक्षाकृत सामान्य रही, लेकिन इसके बाद विधानसभा के बाहर हुई घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
हुड्डा ने सदन में दिखाई फटी शर्ट

विधानसभा गेट पर कांग्रेस विधायकों के साथ कथित धक्का-मुक्की का मामला सदन में जोरदार तरीके से उठा।
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सदन में अपनी शर्ट की फटी हुई जेब दिखाते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा में प्रवेश के दौरान उनके साथ भी धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार हुआ।
हुड्डा ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि लंबे संसदीय जीवन में उन्होंने विधानसभा में प्रवेश के दौरान इस प्रकार का व्यवहार पहले नहीं देखा। कांग्रेस विधायक इस मामले में कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
दो बार स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही
विधानसभा गेट की घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद लगातार बढ़ता गया। कांग्रेस विधायकों के विरोध के चलते सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।
विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने विपक्ष को अपने चैंबर में आकर घटना की वीडियो फुटेज देखने का प्रस्ताव दिया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस बात को लेकर भी बहस हुई कि वीडियो सदन में दिखाया जाए अथवा अध्यक्ष के चैंबर में देखा जाए।
कांग्रेस के आठ विधायक निलंबित
हंगामा शांत नहीं होने और कांग्रेस विधायकों के वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के आठ विधायकों को दिन की शेष कार्यवाही के लिए निलंबित कर दिया।
मार्शलों को निलंबित विधायकों को सदन से बाहर ले जाना पड़ा। इस दौरान भी कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते रहे। निलंबन की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस के अन्य विधायकों ने भी सरकार और विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर सवाल उठाए और अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया।
कानून-व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने माना—फिरौती के मामले 17 प्रतिशत बढ़े
राजनीतिक हंगामे के बीच सदन में कानून-व्यवस्था का महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठा।
इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल और अर्जुन चौटाला द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन में स्वीकार किया कि प्रदेश में फिरौती के मामलों में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री द्वारा सदन में दिए गए आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2026 तक हरियाणा में फिरौती की 296 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में इनकी संख्या 253 थी।
मुख्यमंत्री ने इसके पीछे विदेश से फोन करने वाले अपराधियों द्वारा डिजिटल एप और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अपनी पहचान और लोकेशन छिपाने को एक प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने कहा कि संगठित अपराध, गैंगस्टरों, अवैध हथियारों और गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों के खिलाफ एसटीएफ और एंटी टेरर स्क्वॉड द्वारा खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
सड़क का टकराव सदन तक पहुंचा
मानसून सत्र के पहले दिन की खास बात यह रही कि विधानसभा के भीतर जनहित के मुद्दों पर बहस शुरू होने से पहले ही विधानसभा गेट पर हुआ सत्ता-विपक्ष का टकराव सदन की कार्यवाही पर हावी हो गया।
कांग्रेस विधायकों ने अपने साथ कथित दुर्व्यवहार को लोकतांत्रिक अधिकारों का मामला बनाया, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की मर्यादा और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया।
नतीजा यह रहा कि मानसून सत्र का पहला दिन सरकार की नीतियों पर विस्तृत चर्चा से अधिक विधानसभा गेट की घटना, विधायकों के निलंबन और सत्ता-विपक्ष के टकराव के कारण चर्चा में रहा।
पहले ही दिन मिल गए आगे के सत्र के संकेत
27 अगस्त से शुरू हुआ विधानसभा का यह सत्र 1 सितंबर तक निर्धारित है। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस सत्र के लिए बड़ी संख्या में प्रश्न और सरकारी विधेयक सूचीबद्ध हैं।
पहले दिन जिस तरह कांग्रेस और सरकार आमने-सामने आए हैं, उससे साफ संकेत है कि आने वाली बैठकों में भी कानून-व्यवस्था, रोजगार, कर्मचारियों के आंदोलन, नागरिक सुविधाओं और दूसरे मुद्दों को लेकर सदन में राजनीतिक तापमान ऊंचा रह सकता है।
मानसून सत्र का पहला दिन एक सवाल भी छोड़ गया—जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने के लिए बुलाया गया सदन आने वाले दिनों में सार्थक बहस का मंच बनेगा या सत्ता और विपक्ष का टकराव ही कार्यवाही पर हावी रहेगा?








