आर्थिक तरक्की और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ, सामूहिक प्रयासों से बनेगा सस्टेनेबल गुरुग्राम : राव इंद्रजीत सिंह

गुरुग्राम, 14 अगस्त। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तथा योजना मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने शुक्रवार को गुरुग्राम में गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक 2026 का विमोचन किया। गुड़गांव फर्स्ट संस्थान द्वारा प्रकाशित श्रृंखला का यह पांचवां प्रकाशन है।
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि गुरुग्राम आज भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते और गतिशील शहरों में से एक है। पिछले कुछ दशकों में इसकी ज़बरदस्त तरक्की ने कई नए और बड़े मौके पैदा किए हैं, लेकिन साथ ही पानी की सुरक्षा, कचरा प्रबंधन, आवागमन, ऊर्जा, प्रशासन और सामाजिक समावेश जैसे क्षेत्रों में जटिल चुनौतियां भी खड़ी की हैं। जैसे-जैसे गुरुग्राम का विस्तार हो रहा है, विकास के लिए ‘सस्टेनेबिलिटी’ (स्थिरता) को मुख्य आधार बनाना ज़रूरी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्थिक तरक्की और पर्यावरण की देखभाल एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं; बल्कि ये ऐसे पूरक लक्ष्य हैं जो आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता तय करेंगे। एक मज़बूत, समावेशी और पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार गुरुग्राम बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों/संस्थानों, इंडस्ट्री, सिविल सोसाइटी, शिक्षण संस्थानों और हर नागरिक के सामूहिक प्रयासों की ज़रूरत है। ‘गुरुग्राम सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट 2026’ इस साझा विज़न की दिशा में एक समयोचित और महत्वपूर्ण योगदान है।
गुरुग्राम के सोयल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में आयोजित कार्यक्रम में गुड़गांव फर्स्ट की संस्थापक एवं निदेशक शुभ्रा पुरी, शोधकर्ता आयुष दास गुप्ता द्वारा हैंडबुक के प्रमुख निष्कर्षों की प्रस्तुति दी गई। क्षेत्र विशेषज्ञ चेतन अग्रवाल, राहुल खेरा, सारिका पांडा भट्ट और संगीता नैयर ने भी विभिन्न क्षेत्रों का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गुड़गांव सस्टेनेबिलिटी हैंडबुक 2026 नीति-निर्माताओं, व्यवसायों, शोधकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों के लिए एक उपयोगी संसाधन के रूप में तैयार की गई है। इसका उद्देश्य गुड़गांव को अधिक टिकाऊ, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार शहर बनाने की दिशा में व्यापक संवाद और ठोस कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है।
कार्यकम में मानेसर की मेयर डॉ इंद्रजीत यादव सहित स्थिरता क्षेत्र के विशेषज्ञों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया।








