कलेक्टर रेट से जोड़कर प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने का फैसला जनता की जेब पर सीधा हमला, कहीं तीन तो कहीं 20 गुना तक बढ़ेगा बोझ- राव नरेंद्र सिंह
चंडीगढ़,11 अगस्त – हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स की गणना को कलेक्टर रेट से जोड़ने के फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही प्रदेश की जनता पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार ने प्रॉपर्टी टैक्स का नया वार कर दिया है। सरकार का यह फैसला आम आदमी, दुकानदार, व्यापारी और मकान मालिकों की जेब पर सीधा हमला है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि 1 अगस्त 2026 से लागू की गई नई व्यवस्था में प्रॉपर्टी टैक्स की गणना कलेक्टर रेट को आधार बनाकर की जा रही है। इससे रिहायशी संपत्तियों पर 25 से 50 प्रतिशत तक और व्यावसायिक संपत्तियों पर इससे भी अधिक बोझ पड़ने की आशंका है। कई मामलों में टैक्स तीन गुना से लेकर 20 गुना तक बढ़ने की स्थिति सामने आ रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब कलेक्टर रेट लगातार बढ़ाए जा रहे हैं तो उसी बढ़े हुए कलेक्टर रेट को आधार बनाकर हर साल प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने का फैसला क्यों किया गया है। इससे आम परिवारों के लिए मकान रखना, दुकानदारों के लिए दुकान चलाना और व्यापारियों के लिए व्यावसायिक संपत्ति रखना लगातार महंगा होता जाएगा।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि 1 अप्रैल 2026 को ही प्रदेश में आवासीय, व्यावसायिक और कृषि भूमि के कलेक्टर रेट में भारी बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले भी कलेक्टर रेट में लगातार वृद्धि होती रही है। ऐसे में अब प्रॉपर्टी टैक्स को कलेक्टर रेट से जोड़ने का सीधा अर्थ है कि भविष्य में कलेक्टर रेट बढ़ने के साथ लोगों की प्रॉपर्टी टैक्स की देनदारी भी बढ़ती जाएगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पहले ही मकान, दुकान और जमीन की रजिस्ट्री तथा स्टांप ड्यूटी के माध्यम से जनता पर भारी आर्थिक बोझ डाल रही है।
अब प्रॉपर्टी टैक्स की नई व्यवस्था से आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
73.60 रुपये का टैक्स बढ़कर 220.14 रुपये पहुंचा
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के दावों के विपरीत जमीन पर नई व्यवस्था का असर सामने आने लगा है। उदाहरण के तौर पर पुराने शहर के चक्रवर्ती मोहल्ले में 25.5 वर्गमीटर के मकान का प्रॉपर्टी टैक्स पहले 73.60 रुपये था, जबकि नए प्रॉपर्टी टैक्स कैलकुलेटर में यह बढ़कर 220.14 रुपये दिखाई दे रहा है। यानी एक ही संपत्ति पर टैक्स करीब तीन गुना हो गया।
इसी प्रकार सेक्टर-13 में 263 वर्गगज के आवासीय प्लॉट, जिस पर एक फ्लोर बना हुआ है, का वर्ष 2026-27 तक प्रॉपर्टी टैक्स 132 रुपये था। नई व्यवस्था में कलेक्टर रेट और निर्धारित टैक्स दर के आधार पर यह करीब 2668 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
व्यावसायिक संपत्तियों पर 20 गुना तक बढ़ने का खतरा
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि व्यावसायिक संपत्तियों के मामले में स्थिति और भी गंभीर है। सेक्टर-17 की एक व्यावसायिक संपत्ति के उदाहरण में कलेक्टर रेट और नई टैक्स दर के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स में कई गुना वृद्धि का अनुमान सामने आया है। ऐसे में छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और व्यवसायिक संपत्ति मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में लाखों प्रॉपर्टी आईडी हैं। यदि हर साल कलेक्टर रेट में वृद्धि के साथ प्रॉपर्टी टैक्स भी बढ़ता गया तो आने वाले वर्षों में यह आम जनता के लिए स्थायी आर्थिक बोझ बन जाएगा।
कांग्रेस की मांग—नई व्यवस्था तत्काल वापस ले सरकार
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार जनता को यह बताए कि कलेक्टर रेट को प्रॉपर्टी टैक्स का आधार बनाने की जरूरत क्यों पड़ी और इससे प्रदेश के आम नागरिक पर कितना अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने मांग की कि:
कलेक्टर रेट से प्रॉपर्टी टैक्स जोड़ने की नई व्यवस्था तत्काल वापस ली जाए।
पुराने प्रॉपर्टी टैक्स में मनमानी बढ़ोतरी न की जाए।
रिहायशी संपत्तियों पर टैक्स बढ़ाने से पहले आम जनता को राहत दी जाए।
छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को अतिरिक्त टैक्स बोझ से बचाया जाए।
सरकार पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था के तहत आने वाले प्रॉपर्टी टैक्स का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करे।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि “भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि मकान और दुकान जनता के लिए सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उनके जीवन भर की कमाई और परिवार की सुरक्षा हैं। सरकार टैक्स के नाम पर लोगों की मेहनत की कमाई पर लगातार बोझ नहीं डाल सकती।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ जनता की आवाज को मजबूती से उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी।








